
नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। राजधानी दिल्ली में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित विशाल जनजातीय महाकुंभ में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आदिवासी समाज को सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा बताते हुए मतांतरण और सांस्कृतिक विघटन पर तीखा प्रहार किया।
देशभर से पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक गीतों के साथ पहुंचे जनजातीय समुदायों के बीच शाह ने कहा कि यह केवल आयोजन नहीं, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान के बाद देश को एक सूत्र में जोड़ने वाला सबसे बड़ा सांस्कृतिक आंदोलन है। इस समागम में विष्णुदेव साय, मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप समेत सैकड़ों जनजातीय समुदाय के लोग शामिल हुए।
अमित शाह ने कहा कि उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा को नहीं देखा, लेकिन इस महाकुंभ में उपस्थित जनसमुदाय में उन्हें बिरसा मुंडा की आत्मा और संघर्ष जीवंत दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का प्रकृति पूजन, जल-जंगल-पहाड़ से जुड़ा जीवन और सामुदायिक संस्कृति ही भारत की सबसे बड़ी सस्टेनेबल जीवन पद्धति है।
मतांतरण के मुद्दे पर भी कड़ा संदेश
शाह ने कहा कि वनवासी समाज प्रकृति की पूजा करता है और यही परंपरा उसे सनातन संस्कृति से जोड़ती है। अपने भाषण में शाह ने बिना नाम लिए मतांतरण के मुद्दे पर भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संविधान हर व्यक्ति को अपने मूल धर्म और परंपराओं के साथ सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार देता है, लेकिन लोभ, लालच और जबरन मतांतरण का अधिकार किसी को नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में एक षड्यंत्र के तहत जनजातीय समाज को उसकी जड़ों और परंपराओं से काटने की कोशिश की जा रही है।
राम ने वनवासियों को सम्मान दिया
अमित शाह ने अपने संबोधन में रामायण प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम ने शबरी के बेर खाकर और निषादराज के पांव धोकर यह संदेश दिया था कि वनवासी और सनातन संस्कृति अलग नहीं, बल्कि एक ही सांस्कृतिक चेतना के हिस्से हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग जनजातीय समाज और सनातन परंपरा के बीच भेद पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें इतिहास और भारतीय संस्कृति की मूल भावना समझनी चाहिए।
छत्तीसगढ़ में माओवाद से मुक्ति और सेवा डेरा का उल्लेख
अपने भाषण में शाह ने छत्तीसगढ़ और बस्तर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि दशकों तक माओवादी हिंसा ने जनजातीय क्षेत्रों के विकास को रोके रखा। उन्होंने दावा किया कि माओवाद के कारण देशभर में 40 हजार से अधिक जनजातीय लोगों की मौत हुई, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है।
शाह ने कहा कि बस्तर के जिन इलाकों में कभी सुरक्षा बलों के कैंप थे, वहां अब बलिदानी वीर गुंडाधूर सेवा डेरा बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे करीब 70 कैंपों को जनसुविधा केंद्रों में बदलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण से जुड़ी सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी।
मालूम हो कि बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में शामिल होने से पहले केंद्रीय गृहमंत्री ने नेतानार में बस्तर के पहले सेवा डेरे का लोकार्पण किया था, जहां एक ही छत के नीचे बैंकिंग, वनोपज प्रसंस्करण, कौशल प्रशिक्षण समेत सरकार की 350 से अधिक योजनाओं का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा।
यूसीसी और पेसा कानून पर भी दिया संदेश
अमित शाह ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर फैल रही आशंकाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में लागू यूसीसी में जनजातीय समुदायों की परंपराओं और अधिकारों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। शाह ने कहा कि यूसीसी से किसी भी जनजातीय परंपरा या सामाजिक व्यवस्था से छेड़छाड़ नहीं होगी।
उन्होंने पेसा कानून, एकलव्य मॉडल स्कूल, मुफ्त राशन, आवास और जनजातीय कल्याण बजट का जिक्र करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया है। शाह ने कहा कि कांग्रेस शासन में जनजातीय कल्याण का बजट जहां 28 हजार करोड़ रुपये था, वहीं अब इसे बढ़ाकर डेढ़ लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया गया है।