
डिजिटल डेस्क। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वस्त किया है कि जनजातियों पर यूनिफार्म सिविल कोड (यूसीसी) से कोई पाबंदी नहीं लगने वाली है। रामलीला मैदान में आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम में उन्होंने कहा कि एक षड्यंत्र के तहत यह कहा जा रहा है कि यूसीसी जनजातियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं के साथ जीने के अधिकार से वंचित करेगा।
उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री होने के नाते वह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि यूसीसी की कोई भी पाबंदी वनवासी समाज या किसी वनवासी व्यक्ति पर लागू नहीं होगी। यूसीसी से वनवासियों के अधिकारों का कोई अतिक्रमण नहीं होगा।
गुजरात और उत्तराखंड में यूसीसी लागू किया गया
शाह ने कहा कि दो राज्यों गुजरात और उत्तराखंड में यूसीसी लागू किया गया है और वहां विशेष प्रावधान कर सभी जनजातियों को यूसीसी से बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग भ्रम फैला रहे हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि यूसीसी से किसी भी वनवासी भाई या जनजाति की परंपराओं से खिलवाड़ नहीं होगा। उन्होंने वनवासियों से आह्वान किया कि वे यह संदेश लेकर जाएं कि यूसीसी से डरने की जरूरत नहीं है।
अमित शाह ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने सभी को अपने मूल धर्म में सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया है। लोभ, लालच या जबरन कोई किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकता। उन्होंने कहा कि जनजाति कुंभ में शामिल सभी लोग यह संकल्प लेकर जाएं कि उनका जो भी धर्म है, वे उसकी रक्षा करेंगे। वनवासी प्रकृति की पूजा करते हैं और यही परंपरा उन्हें सनातन संस्कृति से जोड़ती है।
रामायण प्रसंगों का किया उल्लेख
अमित शाह ने कहा कि हजारों साल पहले भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाकर और निषादराज के पैर धोकर यह संदेश दिया था कि वनवासी और सनातन संस्कृति अलग नहीं, बल्कि एक ही सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग समाज में भेद पैदा करना चाहते हैं, आज का यह समागम उनके लिए बड़ा संदेश है।
बिरसा मुंडा आंदोलन का किया जिक्र
अमित शाह ने कहा कि यह जनजाति समागम आने वाले वर्षों तक याद किया जाएगा। यह जनजातियों की पहचान, संस्कृति और एकता को सुरक्षित रखने का आंदोलन है। उन्होंने इसे भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान आंदोलन के बाद सबसे बड़ा जनजातीय आंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि आज यहां देश के सुदूर इलाकों से पारंपरिक वाद्य यंत्रों, गीतों और नृत्य के साथ पहुंचे जनसमुदाय को देखकर ऐसा लगता है मानो भगवान बिरसा मुंडा साक्षात उपस्थित हों।
नक्सलवाद और जनजातीय विकास पर बोले शाह
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से नक्सल समस्या का समाधान हुआ है और अब देश नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय क्षेत्रों, पहाड़ों और जंगलों में विकास का नया दौर शुरू होगा।
शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश में जनजाति कल्याण मंत्रालय की स्थापना कर जनजातीय समाज को सशक्त करने की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में जनजातीय कल्याण का बजट 28 हजार करोड़ रुपये था, जिसे मोदी सरकार ने बढ़ाकर डेढ़ लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया है। शाह ने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पद पर पहली बार संथाल परिवार की द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति हैं। उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में जनजातीय मुख्यमंत्री हैं और भाजपा लगातार जनजातीय समाज को आगे बढ़ाने का काम कर रही है।