
डिजिटल डेस्क। बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र के करोड़ों लोगों के लिए यातायात को सुगम बनाने की दिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक बड़ी पहल की है। लंबे समय से भारी जाम और संकरी सड़क की समस्या से जूझ रहे बांदा-टांडा मार्ग को अब फोरलेन में तब्दील किया जाएगा। वाहनों के बढ़ते दबाव को देखते हुए NHAI ने 6500 करोड़ रुपये का विस्तृत प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को मंजूरी के लिए भेज दिया है।
यह मार्ग बांदा, फतेहपुर, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर और अंबेडकरनगर को जोड़ता है। साथ ही यह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी का मुख्य जरिया है, जो भोपाल और लखनऊ जैसी दो बड़ी राजधानियों को जोड़ता है। इस मार्ग पर कबरई, भरतकूप और छतरपुर से गिट्टी-मौरंग लेकर कानपुर, प्रतापगढ़, गोंडा और बहराइच जाने वाले भारी वाहनों का अत्यधिक दबाव रहता है। संकरी सड़क के कारण प्रतिदिन लंबा जाम लगता है, जिससे स्कूली वाहन और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
300 किमी लंबा डिवाइडर: दुर्घटनाओं को रोकने और सुचारू यातायात के लिए पूरे मार्ग पर डिवाइडर बनाया जाएगा।
गंगा-यमुना पर नए पुल: बांदा के बेंदा गांव (यमुना नदी) और फतेहपुर के असनी गांव (गंगा नदी) में नए बड़े पुलों का निर्माण होगा।
बाईपास और फ्लाईओवरों का जाल: घनी आबादी वाले बहुआ और शाह कस्बों में नए बाईपास बनेंगे। इसके अतिरिक्त, फतेहपुर बाईपास पर दूसरा आरओबी (ROB) और लखनऊ बाईपास पर एक नया फ्लाईओवर ब्रिज प्रस्तावित है, जिससे कानपुर-प्रयागराज हाईवे पर चढ़ना आसान हो जाएगा।
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फोरलेन बनने से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भारी कमी आएगी। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने इस परियोजना का स्वागत किया है, क्योंकि इससे क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी।