डामर की किल्लत से यूपी में बदलेगा सड़क बनाने का तरीका, PWD का नया प्लान; अब सीमेंट-कंक्रीट पर रहेगा जोर
सड़कों के निर्माण और मरम्मत में डामर का इस्तेमाल कम किया जाएगा, जबकि सीमेंट-कंक्रीट आधारित तकनीक को प्राथमिकता दी जाएगी। ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 24 May 2026 03:38:44 PM (IST)Updated Date: Sun, 24 May 2026 03:38:44 PM (IST)
डामर की कमी के बीच यूपी में सड़क निर्माण की नई रणनीतिHighLights
- डामर की कमी के बीच यूपी में सड़क निर्माण की नई रणनीति
- अब सड़क निर्माण में बढ़ेगा सीमेंट-कंक्रीट का इस्तेमाल
- ग्रामीण और ग्रीन फील्ड सड़कों के लिए नए निर्देश जारी
डिजिटल डेस्क। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच देशभर में कई चीजों की कमी हो रही है. इन्हीं में से एक है डामर (बिटुमिन) की आपूर्ति. इसके प्रभावित होने के बाद उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने सड़क निर्माण की नई रणनीति तैयार की है। अब सड़कों के निर्माण और मरम्मत में डामर का इस्तेमाल कम किया जाएगा, जबकि सीमेंट-कंक्रीट आधारित तकनीक को प्राथमिकता दी जाएगी।
विस्तृत दिशा-निर्देश जारी
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद पीडब्ल्यूडी विभागाध्यक्ष एके द्विवेदी ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग का मानना है कि सीमेंट-कंक्रीट आधारित सड़कें ज्यादा मजबूत और टिकाऊ साबित होंगी।
नई व्यवस्था के तहत राज्य मार्ग, प्रमुख जिला मार्ग और अन्य जिला मार्गों के नवीनीकरण में जहां सड़क की सतह ज्यादा खराब नहीं है, वहां बिटुमिन-कंक्रीट की जगह माइक्रो सरफेसिंग तकनीक अपनाई जाएगी।
इसके अलावा जिन सड़कों के सुदृढ़ीकरण में वेट मिक्स मैकाडम की एक या दो परतें बननी हैं, वहां सीमेंट ट्रीटेड बेस और सीमेंट ट्रीटेड सब बेस का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि जहां केवल बिटुमिन लेयर की जरूरत होगी, वहां पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी।
सीमेंट ट्रीटेड बेस तकनीक को बढ़ावा
ग्रीन फील्ड सड़क परियोजनाओं में भी प्राकृतिक मिट्टी, बजरी और पत्थरों की परतों के बजाय सीमेंट ट्रीटेड बेस तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में दो किलोमीटर से अधिक लंबाई और अधिक यातायात दबाव वाले मार्गों को सीमेंट-कंक्रीट डिजाइन के तहत तैयार करने की योजना बनाई गई है। विभाग का कहना है कि इससे डामर पर निर्भरता कम होगी और सड़कें अधिक टिकाऊ बन सकेंगी।