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बिजनेस डेस्क। केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत पीएफ कैलकुलेशन के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है। इसके चलते आपकी इन-हैंड (टेक-होम) सैलरी घटकर आई है। नए नियम के तहत, पहले अनिवार्य पीएफ के लिए सैलरी से 1,800 रुपये कटते थे, लेकिन अब यह कटौती बढ़कर 3,000 रुपये प्रति माह हो गई है।
हालांकि, इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है, क्योंकि कटने वाला पैसा आपका ही है। आज भले ही इन-हैंड सैलरी कटकर आ रही है, लेकिन इससे आपका भविष्य ज्यादा सुरक्षित हो रहा है।
अभी जितना अधिक पैसा आपकी सैलरी से कट रहा है, उतना ही पैसा कंपनी को भी अपनी तरफ से आपके पीएफ और पेंशन खाते में डालना होगा। इसका मतलब अब आपके पीएफ और पेंशन खाते में हर महीने 2,400 रुपये अतिरिक्त जमा हो रहे हैं (1,200 रुपये आपकी सैलरी से और 1,200 रुपये कंपनी की तरफ से अतिरिक्त)। इस पर EPFO की तरफ से सालाना करीब 8.25% का चक्रवृद्धि ब्याज मिलेगा, जिससे रिटायरमेंट के वक्त आपका फंड पहले की तुलना में काफी बड़ा हो जाएगा।
पहले कंपनी आपके पेंशन खाते (EPS) में अधिकतम 1,250 रुपये प्रति माह (15,000 रुपये का 8.33%) ही जमा कर पाती थी। अब सीमा बढ़ने से कंपनी हर महीने आपके पेंशन फंड में 2,082.50 रुपये (25,000 रुपये का 8.33%) जमा करेगी।
पहले 15,000 रुपये की वेज लिमिट पर आपका हिस्सा 1,800 रुपये और कंपनी का कुल हिस्सा 1,800 रुपये मिलाकर कुल 3,600 रुपये जमा होते थे। अब 25,000 रुपये की नई सीमा में कुल 6,000 रुपये जमा होंगे, जिसमें 1,200 रुपये कंपनी अपनी तरफ से अतिरिक्त दे रही है।
कंपनी जो आपकी 25,000 रुपये की सैलरी पर अपनी तरफ से 12% (यानी 3,000 रुपये) जमा करती है, वह पैसा एक जगह नहीं बल्कि दो अलग-अलग खातों में बंटता है:
पहला पीएफ (EPF) खाता: कंपनी के 3,000 रुपये में से 3.67% हिस्सा आपके पीएफ खाते में जाता है, जो 25,000 रुपये के हिसाब से 917.50 रुपये होता है।
दूसरा पेंशन (EPS) खाता: बाकी बचा 8.33% हिस्सा आपके पेंशन खाते में जमा होता है, जो 25,000 रुपये के हिसाब से 2,082.50 रुपये बनता है।