
बिजनेस डेस्क। होम लोन मंजूर होना अपना घर खरीदने की दिशा में एक बड़ा कदम लगता है। बैंक आपकी आय का आकलन कर चुका होता है, आपको बता चुका होता है कि आप कितना लोन ले सकते हैं और आपके सामने एक तय रकम होती है। अब आप प्रॉपर्टी चुनने, डाउन पेमेंट की व्यवस्था करने और जरूरी दस्तावेज पूरे करने पर ध्यान दे सकते हैं।
लेकिन एक गणना ऐसी है, जो बैंक आपके लिए नहीं कर सकता। वह यह कि आपके रोजमर्रा के जीवन और आर्थिक जिम्मेदारियों के बीच EMI चुकाना आपके लिए कितना आसान होगा।
उदाहरण के लिए, अगर आप 9% सालाना ब्याज दर पर 20 साल के लिए 1 करोड़ रुपये का होम लोन लेते हैं, तो आपकी मासिक EMI लगभग 90,000 रुपये होगी। लोन की पूरी अवधि में आप करीब 2.16 करोड़ रुपये चुकाएंगे, जिसमें से लगभग 1.16 करोड़ रुपये केवल ब्याज होगा। यानी यह लंबे समय तक चलने वाली एक बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता है। और EMI इस पूरी तस्वीर का केवल एक हिस्सा है।
लोन की पात्रता यह बताती है कि आप कितना उधार ले सकते हैं, जबकि लोन चुकाने की क्षमता यह तय करती है कि आप कितनी रकम आसानी से चुका सकते हैं।
लोन लेने का अंतिम फैसला करने से पहले इन पांच बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
कागजों पर आपकी सैलरी अच्छी लग सकती है, लेकिन असली मायने उस रकम के हैं, जो जरूरी खर्चों, मौजूदा EMI और नियमित बचत को अलग रखने के बाद आपके पास बचती है।
अगर आपकी मासिक इन-हैंड सैलरी 2.25 लाख रुपये है, तो 90,000 रुपये की EMI आपकी आय का 40% हिस्सा ले लेगी। अगर आप कार लोन की 15,000 रुपये की मासिक EMI भी चुका रहे हैं, तो आपकी कुल EMI और आय का अनुपात बढ़कर लगभग 47% हो जाएगा।
ऐसी स्थिति में रोजमर्रा के खर्चों, भविष्य के लक्ष्यों और अचानक आने वाले खर्चों के लिए बहुत कम गुंजाइश बच सकती है। अतुल मोंगा, CEO और को-फाउंडर, BASIC Home Loan का कहना है कि इसलिए अपना बजट किसी असाधारण महीने की आय या खर्च के आधार पर नहीं, बल्कि एक सामान्य महीने की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर बनाएं।
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घर खरीदते समय डाउन पेमेंट ही आपका एकमात्र शुरुआती खर्च नहीं होता। स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, कानूनी फीस, घर के इंटीरियर और शिफ्टिंग पर होने वाला खर्च कुल लागत को काफी बढ़ा सकता है।
लोन लेने का फैसला करने से पहले इन खर्चों का आकलन जरूर करें। अगर घर खरीदने में आप अपनी पूरी बचत खर्च कर देते हैं, तो जीवन के इस नए अध्याय की शुरुआत में ही आपकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
अगर आपकी आय रुक जाती है या कम हो जाती है, तो भी EMI चुकाने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। इसी तरह, अचानक कोई बड़ा खर्च आ जाने पर भी लोन की किस्त का भुगतान करना जरूरी रहता है।
इसलिए कम से कम तीन से छह महीने के जरूरी खर्चों के बराबर इमरजेंसी फंड रखना एक अच्छा शुरुआती कदम है। उदाहरण के लिए, अगर आपके परिवार का मासिक जरूरी खर्च 1.2 लाख रुपये है, तो आपके पास आसानी से उपलब्ध 3.6 लाख से 7.2 लाख रुपये का इमरजेंसी फंड होना चाहिए।
यह फंड मुश्किल परिस्थितियों में आपकी बचत और नियमित खर्चों को संभालने में मदद कर सकता है।
कम EMI का मतलब हमेशा कम खर्च नहीं होता। कई बार EMI कम करने के लिए लोन की अवधि बढ़ाने से लंबे समय में ब्याज का बोझ काफी बढ़ जाता है।
उदाहरण के लिए, 9% सालाना ब्याज दर पर 1 करोड़ रुपये के होम लोन को ही लें। अगर लोन की अवधि 20 साल से बढ़ाकर 25 साल कर दी जाए, तो मासिक EMI लगभग 90,000 रुपये से घटकर 84,000 रुपये रह जाएगी।
लेकिन इस दौरान कुल ब्याज लगभग 1.16 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.52 करोड़ रुपये हो जाएगा। यानी हर महीने करीब 6,000 रुपये की बचत करने के लिए आपको लगभग 36 लाख रुपये अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ सकता है।
कुछ परिवारों के लिए कम EMI का विकल्प उपयोगी हो सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि फैसला लेने से पहले आप समझें कि लोन की लंबी अवधि में इसकी वास्तविक लागत कितनी होगी।
यह जरूरी नहीं कि आपकी आय उम्मीद के मुताबिक बढ़े। खर्च बढ़ सकते हैं और ब्याज दरों में भी बदलाव हो सकता है।
20 साल की लोन अवधि के दौरान अगर 1 करोड़ रुपये के होम लोन पर ब्याज दर 9% से बढ़कर 10% हो जाती है, तो आपकी मासिक EMI लगभग 90,000 रुपये से बढ़कर 96,500 रुपये हो जाएगी। यानी आपको हर महीने करीब 6,500 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे।
क्या आपका परिवार जरूरी खर्चों में कटौती किए बिना या अपनी बचत का इस्तेमाल किए बिना इस बढ़ी हुई EMI को संभाल पाएगा?
होम लोन का उद्देश्य आपको अपनी संपत्ति बनाने में मदद करना होना चाहिए, न कि आपकी बाकी वित्तीय जिंदगी को मुश्किल बनाना। असली उपलब्धि केवल होम लोन मंजूर होना नहीं है। अतुल मोंगा, CEO और को-फाउंडर, BASIC Home Loan के अनुसार असली उपलब्धि यह सुनिश्चित करना है कि आप लोन की किस्तें समय पर चुका सकें और साथ ही अपनी मनचाही जिंदगी जीने के लिए भी पर्याप्त आर्थिक गुंजाइश बनाए रख सकें।