
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पश्चिम एशिया के युद्ध व डॉलर के मजबूत होने से देश में सोने-चांदी की कीमतों में कभी गिरावट आती है तो कभी तेजी आ रही है। ऐसे में सोने-चांदी में निवेश करने को लेकर शहर के लोग असमंजस में हैं। वहीं यही हाल शेयर बाजार में है। ऐसे में शहर में निवेश को लेकर लोगों का ट्रेंड कुछ बदला है। लोगों का बैंकों में एफडी करने का ट्रेंड बढ़ रहा है।
वित्त विशेषज्ञों का भी मानना है कि वर्तमान में सोने-चांदी में निवेश करना सही नहीं है। एफडी में निवेश करने पर एक निश्चित ब्याज तो मिलता ही है और किसी तरह का रिस्क नहीं है।
सीए आशीष पारेख के मुताबिक जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत स्थिति में रहता है तब सोने के दाम देश में गिरते हैं। यदि सोना मजबूत यानी महंगा होता है तो डॉलर कमजोर होता है। वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका निवेश को अपने यहां बढ़ा रहा है। इस वजह से डॉलर मजबूत हो रहा है। जिससे देश में सोने-चांदी के भाव लगातार ऊपर-नीचे हो रहे हैं। सीए पारेख के मुताबिक वर्तमान में सरकार भी नहीं चाहती कि सोना खरीदा जाए, जिससे डॉलर मजबूत हो।
सोना पहले से ही महंगा था, चूंकि सोना बाहर से मंगाया जाता है तो उसकी खरीद-फरोख्त डॉलर में होती है। सोने में देश के लोग कम इन्वेस्ट करें इसलिए इस पर टैक्स भी बढ़ाया गया है। इसलिए वर्तमान में सोना खरीदना समझदारी नहीं है। पश्चिम एशिया के युद्ध की वजह से वर्तमान में पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित है। इसलिए चांदी के भावों में गिरावट आ रही है।
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सीए आशीष पारेख के मुताबिक वर्तमान परिस्थितियों में बाजार में सोने-चांदी की मांग कम हुई है। यही हाल ग्वालियर सराफा में भी है। लोग अब सुरक्षित निवेश के लिए बैंकों में एफडी कर रहे हैं। इसका फायदा यह है कि एक तो पूरा पैसा सुरक्षित रहता है, दूसरे बैंक सात से साढ़े आठ प्रतिशत के बीच ब्याज भी देते हैं। इसलिए शहर के लोग भी सोने-चांदी की तरफ न जाकर बैंकों की तरफ जा रहे हैं। इसका एक फायदा यह भी होगा कि बैंकों के पास भी पैसा पहुंचेगा तो वे मजबूत होंगी।