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बिजनेस डेस्क। देश के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी घरानों में से एक टाटा ग्रुप का अंदरूनी घमासान अब राजनीतिक संग्राम का रूप ले रहा है। मामले में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच तीखी बहस शुरू हो चुकी है।
विवाद की मुख्य वजह टाटा ग्रुप में टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के पद पर एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर है। टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख नोएल टाटा ने इस नियुक्ति को सीधे चुनौती दी है। उन्होंने 26 अक्टूबर को कंपनी सेक्रेटरी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया नियमों की अनदेखी कर बिना चयन समिति की सिफारिश के पूरी की गई है। नोएल टाटा ने बोर्ड बैठक के मिनट्स और वोटिंग डिटेल्स मांगते हुए रेगुलेटर्स को सूचित करने को कहा है कि यह फैसला पूरी तरह विवादित है। इस कदम के बाद से ही टाटा ग्रुप के भीतर कानूनी और रणनीतिक घमासान तेज हो गया है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर टाटा ग्रुप को 'आपराधिक तरीके से बर्बाद करने' के आरोप लगाए हैं। जिस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी को मामले पर राजनीति न करने की सलाह दी थी।
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इसके बाद राहुल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि आखिर किन 'कानूनी और व्यावसायिक मामलों' को सुलझाने के लिए टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के प्रतिनिधियों को गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर बुलाया गया था?
राहुल ने तंज कसते हुए पूछा कि सरकार के 'क्रोनी नंबर 1' की एंट्री इस खेल में कब होगी, उन्हें टाटा का कौन सा हिस्सा दिया जाएगा?
राहुल ने निर्मला सीतारमण से कहा कि आपके 3-4 खास दोस्तों को छोड़कर भारत के बाकी सभी कारोबारी पहले से ही आप सभी से नफरत करते हैं, उन्हें किसी उकसावे की जरूरत नहीं है।
वित्त मंत्री ने राहुल गांधी के आरोपों का करारा जवाब देते हुए कहा, 'हर जगह भूत देखना बंद कर दें'। निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल को हर व्यावसायिक और कानूनी मामले को आपराधिक करार देकर राजनीति करने से बचना चाहिए।
सीतारमण ने कांग्रेस के इतिहास पर भी हमला बोलते हुए कहा कि दशकों तक कांग्रेस के 'लाइसेंस-कोटा राज' ने भारतीय उद्यमियों का दम घोंटा और देश को गरीबी में धकेला।