
बिजनेस डेस्क। भारत में सोना सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद निवेश भी माना जाता है। आमतौर पर लोग अपने सोने को सुरक्षित रखने के लिए बैंक लॉकर का सहारा लेते हैं, लेकिन वहां रखा सोना निष्क्रिय रहता है, न कोई रिटर्न देता है और न ही उसकी उपयोगिता बढ़ती है।
ऐसे में एक स्मार्ट विकल्प के रूप में सामने आती है। इस योजना के तहत व्यक्ति अपने सोने को बैंक में जमा कर उस पर लगभग 2 से 2.5 प्रतिशत तक वार्षिक ब्याज प्राप्त कर सकता है। यानी आपका सोना सिर्फ सुरक्षित ही नहीं रहता, बल्कि आय भी उत्पन्न करता है।
एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें बैंक लॉकर की तरह किसी प्रकार का किराया या मेंटेनेंस शुल्क नहीं देना पड़ता। साथ ही, जमा सोने को तय अवधि पूरी होने पर नकद या सोना, दोनों रूपों में वापस लिया जा सकता है, जिससे निवेश में लचीलापन बना रहता है।
यह योजना महंगाई के प्रभाव से बचाव का भी एक माध्यम बनती है। इसमें मिलने वाला ब्याज कर-मुक्त होता है, जिससे यह कर योजना के लिहाज से भी आकर्षक बन जाती है। पिंकी डोडेजा, चार्टर्ड अकाउंटेंट के अनुसार आर्थिक दृष्टि से भी यह योजना महत्वपूर्ण है।
जब लोग अपना सोना बैंक में जमा करते हैं, तो इससे देश में सोने के आयात की जरूरत कम होती है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
हालांकि, निवेश से पहले इसकी शर्तों जैसे न्यूनतम जमा, लॉक-इन अवधि और मूल्यांकन प्रक्रिया को समझना जरूरी है। सही जानकारी के साथ किया गया निवेश ही अधिक लाभदायक साबित होता है। कुल मिलाकर, गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम पारंपरिक बैंक लॉकर की तुलना में एक अधिक उपयोगी, लाभकारी और दूरदर्शी विकल्प है।