
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर: शहर के व्यस्त गांधी चौक में बुधवार शाम इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। बाइक चोरी के शक में दो नाबालिग बच्चों को कुछ युवकों ने बीच सड़क पर पकड़ लिया और बेल्ट, लात-घूसों से उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश है और कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवकों ने दोनों बच्चों पर बाइक चोरी का संदेह जताते हुए उन्हें रोक लिया और बिना किसी जांच-पड़ताल के सरेआम मारपीट शुरू कर दी। बेल्ट से लगातार वार किए गए, जबकि डरे-सहमे बच्चे खुद को बचाने की कोशिश करते रहे। घटना के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, लेकिन अधिकांश लोग मूकदर्शक बने रहे। हालांकि कुछ महिलाओं और जागरूक नागरिकों ने साहस दिखाते हुए बीच-बचाव का प्रयास किया और बच्चों को बचाने की कोशिश की। इसके बावजूद युवक काफी देर तक मारपीट करता रहा।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों नाबालिगों को अपनी सुरक्षा में लिया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हुई। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि आखिर लोगों में कानून को अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति क्यों बढ़ रही है। किसी भी व्यक्ति पर संदेह होने की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय भीड़ द्वारा सजा देने की मानसिकता न केवल कानून के शासन को चुनौती देती है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
कानून हाथ में लेने का नहीं है अधिकार:धनजंय मिश्रा
अधिवक्ता धनंजय मिश्रा का कहना है कि किसी भी व्यक्ति, विशेषकर नाबालिग बच्चों के साथ मारपीट करना दंडनीय अपराध है। यदि किसी पर चोरी या अन्य अपराध का संदेह हो तो इसकी सूचना पुलिस को देना ही कानूनी और उचित तरीका है। दोषी या निर्दोष होने का फैसला केवल जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।