
नईदुनिया प्रतिनिधि, सूरजपुर: सूरजपुर जिले के दूरस्थ वनांचल चांदनी-बिहारपुर की तस्वीर आज भी विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। ग्राम पंचायत बिहारपुर के आश्रित ग्राम चौकापारा में करीब तीन सौ परिवारों के लिए स्कूल, अस्पताल और मुख्य सड़क तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता बरसात में दलदल में तब्दील हो गया है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, घुटनों तक कीचड़ और फिसलन ने लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या हर साल सामने आती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के आश्वासन के अलावा आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और बीमार मरीजों को झेलनी पड़ रही है।
बरसात शुरू होते ही चौकापारा के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने लगी है। छोटे-छोटे बच्चे नंगे पैर और कपड़े संभालते हुए कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर हैं। कई बार फिसलकर गिरने से उन्हें चोट भी लगती है। अभिभावकों का कहना है कि बारिश तेज होने पर बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा हो जाता है।
बीमार पड़े तो खटिया ही एंबुलेंस
ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दौरान इस रास्ते पर कोई वाहन नहीं पहुंच पाता। यदि किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो मरीज को खटिया पर लिटाकर कई किलोमीटर तक पैदल ले जाना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर बन जाती है।
पंडो जनजाति ज्यादा प्रभावित
चौकापारा में लगभग 100 पंडो जनजाति के परिवार सहित अन्य समुदायों के करीब तीन सौ घर बसे हैं। यह विशेष पिछड़ी जनजाति का इलाका है, जहां सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव विकास योजनाओं की हकीकत बयां करता है।
एक साल से सिर्फ आश्वासन
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक वर्ष से वे सरपंच और सचिव से सड़क पर मुरम डालने की मांग कर रहे हैं। हर बार यह कहकर टाल दिया जाता है कि प्रस्ताव तैयार है और जल्द काम शुरू होगा, लेकिन अब तक सड़क की हालत जस की तस बनी हुई है।
इस संबंध में सरपंच और सचिव का कहना है कि सड़क के मुरमीकरण का एस्टीमेट तैयार किया जा चुका है। मौसम साफ होते ही कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग