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नईदुनिया प्रतिनिधि, प्रतापपुर: एसईसीएल भटगांव क्षेत्र की मदननगर खदान परियोजना को लेकर ग्रामीणों और एसईसीएल के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद अब क्षेत्र में शांति बनी हुई है। शुक्रवार की घटना के बाद भारी संख्या में तैनात पुलिस बल में से आधे अभी भी क्षेत्र में बने हुए है। इधर ग्रामीण भी शांति बनाए हुए हैं। मामले में पुलिस द्वारा डेढ़ सौ से भी अधिक हमलावरों पर एफआईआर दर्ज करने की खबर है। इसमें 15 नामजद हैं।
पुलिस द्वारा घटना से जुड़े वायरल वीडियो व अन्य माध्यमों से अज्ञात हमलावरों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी होने की खबर नहीं है। सूरजपुर पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने शनिवार को भी क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और पुलिस को हर हाल में शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए।
बता दें कि शुक्रवार की सुबह हत्या के प्रयास के एक पुराने मामले में पुलिस के अधिकारी दल-बल के साथ पांच आरोपितों की गिरफ्तारी करने मदननगर गांव में गए थे। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान सरपंच पुत्र रविन्द्र पोया ने पुलिस पर तब्बल से हमला करने का प्रयास किया था जिसके बाद उसे हिरासत में लिया गया था। इस बीच जब गांव में पुलिस के आने की खबर फैली तो लाठी-डंडों सहित घातक हथियारों से लैस हो बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस अधिकारियों पर हमला बोल दिया।
साथ में मौजूद पुलिस बल ने किसी तरह से पुलिस अधिकारियों को बाहर निकाला। हमले में पुलिस अधिकारियों सहित 23 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हालांकि ग्रामीणों का कहना था कि प्रशासन कुछ ग्रामीणों की गिरफ्तारी की आड़ में खदान के लिए मदननगर की भूमि का सर्वे कराना चाहता था जिसका उन्होंने विरोध किया। ग्रामीणों के अनुसार पुलिस के साथ झड़प में उनके लोग भी घायल हुए हैं।
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वायरल वीडियों के जरिए अज्ञात लोगों की हो रही पहचान
सूत्रों के अनुसार पुलिस पर हमला करने के मामले में पुलिस ने मदननगर के लगभग 150 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस पर हमला करने, मार्ग बाधित करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में कई गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में बाबुलाल पोया, बनवारी, फुलजेस, दीपक, चमन सहित 15 नामजद तथा अन्य 135 के लगभग अज्ञात लोग शामिल हैं। पुलिस द्वारा घटना से जुड़े वायरल वीडियो के आधार पर अज्ञात लोगों की पहचान की जा रही है।
वाहनों से किया था मार्ग को अवरूद्ध
शुक्रवार को पुलिस द्वारा सरपंच पुत्र को हिरासत में लिए जाने के बाद ग्रामीणों और पुलिस बल में हुई हिंसक झड़प के दौरान ग्रामीण महिलाओं ने भी पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया था। पथराव से बचने पुलिस बल पीछे हटते हुए सुरक्षित स्थान पर चला गया था। इसके बाद उग्र ग्रामीणों ने चार यात्री बसों सहित एक पुलिस वाहन में जमकर तोड़फोड़ की थी। तोड़फोड़ करने के बाद वाहनों का इस्तेमाल प्रतापपुर-अंबिकापुर मार्ग को अवरूद्ध करने में किया गया था। साथ ही मार्ग में बड़ी-बड़ी लकड़ियां भी डाल दी गई थीं।
लगभग सात घंटे तक घातक हथियारों से लैस ग्रामीण मुख्य मार्ग पर बैठे रहे। पुलिस बल भी मुख्य मार्ग पर ही ग्रामीणों से लगभग दो सौ मीटर की दूरी पर तैनात रहा। इस दौरान यातायात पूरी तरह से बाधित रहा। देर शाम ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल से प्रशासनिक अधिकारियों की हुई बातचीत के बाद ग्रामीण मुख्य मार्ग से हटकर अपने घरों को लौट गए थे। इसके बाद पुलिस ने मार्ग में खड़े वाहनों व लकड़ियों को हटाकर यातायात बहाल किया था। बता दें कि मदननगर में ईसीएल की प्रस्तावित खदान का ग्रामीण लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। इससे पहले भी ग्रामीणों और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव की खबरें सामने आती रही हैं। पर इस बार यह टकराव पुलिस की कल्पना से परे हिंसक झड़प में तब्दील हो गया।