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जहां पानी के लिए भटकते थे ग्रामीण, आज सालभर रहता है जल स्रोत: सूरजपुर के कालामांजल में बदली तस्वीर

सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड स्थित वनांचल ग्राम कालामांजल में कभी पानी का गंभीर संकट था। विकसित भारत योजना के तहत बने कंटूर ट्रेंच और गेबियन डेम से ...और पढ़ें

By Anang Pal DixitEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 05 Aug 2026 11:21:02 AM (IST)Updated Date: Wed, 05 Aug 2026 11:21:02 AM (IST)
जहां पानी के लिए भटकते थे ग्रामीण, आज सालभर रहता है जल स्रोत: सूरजपुर के कालामांजल में बदली तस्वीर
जल संरक्षण के लिए गांव में बना कंटूर ट्रेंच

HighLights

  1. विकसित भारत योजना से वनांचल गांव में आई समृद्धि।
  2. गर्मी में पानी के लिए जूझने वाले ग्रामीणों की बुझी प्यास।
  3. निर्माण कार्यों से 250 से अधिक ग्रामीणों को मिला रोजगार।

नईदुनिया न्यूज, सूरजपुर: ओड़गी विकासखंड के वनांचल ग्राम पंचायत कालामांजल की पहचान कभी पानी के संकट से होती थी। बारिश का अधिकांश पानी बह जाता था और गर्मी शुरू होते ही जल स्रोत सूखने लगते थे। पेयजल से लेकर खेती और मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता था। लेकिन अब यही गांव जल संरक्षण की सफल मिसाल बनकर उभरा है।

विकसित भारत जी-राम-जी योजना के तहत गांव में कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम का निर्माण कराया गया। इन संरचनाओं ने वर्षा जल को रोकने और भूजल पुनर्भरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

साथ ही मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण हुआ और जंगल से बहकर आने वाला मलबा भी जल स्रोत तक पहुंचने से पहले ही रुकने लगा। इसका परिणाम यह हुआ कि गांव का जल स्रोत अब पूरे वर्ष पानी से भरा रहता है।


गांव के निवासी मनोहर सिंह बताते हैं कि पहले गर्मी के दिनों में पानी की तलाश ही सबसे बड़ी चिंता होती थी। खेती प्रभावित होती थी और मवेशियों को पानी पिलाने के लिए भी काफी दूर जाना पड़ता था। अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

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गांव के लोग इसी जल स्रोत का उपयोग पेयजल, स्नान, कपड़े धोने, मवेशियों को पानी पिलाने और मत्स्य पालन तक के लिए कर रहे हैं। सरपंच अर्जुन सिंह के अनुसार, योजना से सिर्फ जल संरक्षण ही नहीं हुआ, बल्कि निर्माण कार्यों के दौरान 250 से अधिक ग्रामीणों को रोजगार भी मिला। इससे गांव की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिली।