नईदुनिया न्यूज, बेमेतरा। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम कन्याशाला बेमेतरा में मध्यान्ह भोजन में कथित रूप से डामर की गोली मिलने से स्कूल की भोजन व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। हालांकि, किसी बच्चे ने पेट दर्द या अन्य स्वास्थ्य संबंधी शिकायत नहीं की, फिर भी एहतियात के तौर पर छठवीं कक्षा के 26 बच्चों को जिला चिकित्सालय भेजा गया, जहां उनकी जांच की गई। सभी बच्चों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, सबसे पहले छठवीं कक्षा के बच्चों ने मध्यान्ह भोजन किया। इसके बाद आठवीं कक्षा के बच्चों को भोजन दिया जाना था। इसी दौरान स्कूल प्राचार्य को भोजन से डामर गोली की गंध आने की सूचना मिली। प्राचार्य ने तत्परता दिखाते हुए बाकी बच्चों को भोजन परोसने से रोक दिया और छठवीं कक्षा के बच्चों को एहतियातन जिला चिकित्सालय भेजा।
रसोइया ने भी चखा था खाना
घटना के संबंध में एक महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि रसोइया ने भी भोजन चखकर देखा था और उसे डामर जैसी गंध महसूस हुई थी। इसके बावजूद इसे सामान्य मानते हुए स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी नहीं दी गई। जब बच्चों ने भी भोजन में असामान्य गंध महसूस की, तब भोजन वितरण रोक दिया गया।
इस लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं कि यदि भोजन चखने के दौरान ही असामान्य गंध महसूस हुई थी, तो स्कूल प्रबंधन को सूचना क्यों नहीं दी गई? समय पर सूचना देने पर बच्चों को अस्पताल ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
रसोइया के बच्चे साथ आई थी गोली
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रसोइया के बच्चे के साथ कथित तौर पर डामर की गोली आई थी, जो खेलते-खेलते भोजन में डाल दी गई। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अन्य बच्चों को रोका गया
प्रधान पाठक रामेश्वर बंजारे ने जैसे ही भोजन में डामर की गोली होने की जानकारी प्राप्त की, उन्होंने तुरंत आठवीं कक्षा सहित अन्य कक्षाओं के बच्चों को भोजन देने से मना कर दिया। इसके बाद छठवीं कक्षा के बच्चों को किसी प्रकार का जोखिम न हो, इसलिए उन्हें तुरंत जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया।
बच्चों की चिकित्सीकय जांच जारी
जिला शिक्षा अधिकारी ने भी मौके पर पहुंचकर घटनाक्रम की जानकारी ली। फिलहाल बच्चों की चिकित्सकीय जांच जारी है और सभी की स्थिति सामान्य बताई जा रही है। इस घटना ने मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, रसोई व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खासकर तब, जब भोजन में असामान्य गंध महसूस होने के बावजूद समय पर स्कूल प्रबंधन को सूचना नहीं दी गई। अब यह जांच में स्पष्ट होना आवश्यक है कि डामर की गोली भोजन में कैसे पहुंची, गंध के बावजूद भोजन क्यों परोसा गया और इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किसकी बनती है।
213 बच्चों के लिए बनाया गया था मध्यान्ह भोजन
संस्था प्रमुख रामेश्वर बंजारे ने बताया कि स्कूल में कुल 273 बच्चे हैं, जबकि आज की उपस्थिति 213 बच्चों की रही। परिणामस्वरूप 213 बच्चों के लिए मध्यान भोजन बनाया गया था। प्रथम दृष्टि में रसोइया की लापरवाही सामने आई है। जिला शिक्षा अधिकारी अभय जायसवाल ने इस पूरे मामले की जांच के लिए सहायक उपसंचालक को जांच अधिकारी नियुक्त किया है।