टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर पर ठगी का आरोप! जिंदल इस्पात में ठेका दिलाने का झांसा देकर 17.52 लाख रुपये ठगे
पूर्व क्रिकेटर राजेश चौहान पर जिंदल इस्पात में ट्रांसपोर्ट ठेका दिलाने का झांसा देकर 17.52 लाख रुपये ठगने का आरोप है। कोर्ट के आदेश पर मोहन नगर पुलिस ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 24 Jul 2026 10:09:33 PM (IST)Updated Date: Fri, 24 Jul 2026 10:09:33 PM (IST)
जिंदल इस्पात में ठेका दिलाने पर ठगी। (फाइल फोटो)HighLights
- राजेश चौहान पर 17.52 लाख की धोखाधड़ी का आरोप।
- फर्जी वर्क ऑर्डर दिखाकर ठेका दिलाने का झांसा दिया।
- पीड़ित से नकद और ऑनलाइन रकम वसूली गई।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिलाई। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑफ स्पिनर राजेश चौहान के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में मोहन नगर पुलिस ने अपराध दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने एक ठेकेदार को जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्ट ठेका दिलाने का झांसा देकर 17 लाख 52 हजार रुपये ले लिए। पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बाद मामले में कार्रवाई शुरू की है।
फर्जी वर्क ऑर्डर दिखाकर साझेदारी का दिया झांसा
- मामले के अनुसार, ठेकेदार दिनकर विश्वमित्र की पहचान उनके दोस्त सरोज कुमार के माध्यम से राजेश चौहान से हुई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि चौहान ने खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बताते हुए उद्योगपति नवीन जिंदल से करीबी संबंध होने की बात कही।
उन्होंने बताया कि उनकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को ओडिशा के क्योंझर स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड से बड़ा ट्रांसपोर्ट ठेका मिला है। इसके बाद उन्होंने दिनकर को ट्रकों के जरिए काम करने और भारी मुनाफा कमाने का प्रस्ताव दिया।
शिकायत के मुताबिक, भरोसा दिलाने के लिए जिंदल इस्पात के नाम से कथित फर्जी वर्क ऑर्डर और अन्य कानूनी दस्तावेज भी दिखाए गए। इस झांसे में आकर दिनकर साझेदारी के लिए तैयार हो गए। 30 जुलाई 2021 को दोनों पक्षों के बीच लिखित इकरारनामा भी हुआ।
इसके बाद दिनकर ने पहली किश्त के रूप में 2 लाख 51 हजार रुपये नकद दिए। वहीं, राजेश चौहान के कहने पर गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी के खाते में दो अलग-अलग किश्तों में 15 लाख 1 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल 17 लाख 52 हजार रुपये दिए गए। जिंदल प्लांट पहुंचने पर खुला फर्जीवाड़े का मामला
- काफी समय बीतने के बाद भी जब ट्रांसपोर्ट का काम शुरू नहीं हुआ तो दिनकर विश्वमित्र खुद ओडिशा स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड के प्लांट पहुंचे। वहां कंपनी अधिकारियों से बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि राजेश चौहान या उनकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को कोई ठेका जारी नहीं किया गया था।
- शिकायतकर्ता के अनुसार, कंपनी अधिकारियों ने यह भी बताया कि दिखाए गए दस्तावेज फर्जी थे। इसके बाद दिनकर ने मामले की शिकायत मोहन नगर थाने और दुर्ग पुलिस अधीक्षक कार्यालय में की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने दर्ज किया मामला
परिवादी की ओर से पेश किए गए तथ्यों पर सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऐश्वर्या दीवान की अदालत ने पुलिस को राजेश चौहान के खिलाफ अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद मोहन नगर पुलिस ने धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।
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