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बारिश, जंगल और उफनते नाले भी नहीं रोक सके कदम, 108 टीम ने खाट पर मरीज लाकर बचाई जान

बीजापुर में बारिश और खराब सड़क के बावजूद 108 एंबुलेंस टीम सात किलोमीटर पैदल चली। स्वास्थ्यकर्मियों और ग्रामीणों ने मरीज को खाट पर लाकर अस्पताल पहुंचाय...और पढ़ें

By Animesh PaulEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Mon, 20 Jul 2026 12:24:10 PM (IST)Updated Date: Mon, 20 Jul 2026 12:24:10 PM (IST)
बारिश, जंगल और उफनते नाले भी नहीं रोक सके कदम, 108 टीम ने खाट पर मरीज लाकर बचाई जान
108 टीम ने खाट पर मरीज लाकर बचाई जान। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. बारिश में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, रास्ता बंद रहा।
  2. स्वास्थ्यकर्मी सात किलोमीटर पैदल चलकर मरीज तक पहुंचे समय पर।
  3. खाट पर लिटाकर मरीज को सुरक्षित बाहर निकालकर लाया गया।

नईदुनिया न्यूज, बीजापुर। प्रदेश के बीजापुर जिले के उसूर ब्लाक में बारिश और बदहाल सड़क ने 108 एंबुलेंस का रास्ता रोक दिया, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों के हौसले नहीं रोक सके। रायगुडा गांव के 22 वर्षीय सावन मडकाम की आधी रात अचानक तबीयत बिगड़ गई।

सांस लेने में तकलीफ की सूचना मिलने पर एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद ईएमटी राजेश वल्पदास, पायलट विनोद मंचराल, परिजन और ग्रामीण खुद सात किमी पैदल चलकर मरीज तक पहुंचे। उसे खाट पर लिटाकर कीचड़, जंगल और उफनते नाले पार करते हुए पुसकोंटा तक लाया गया, जहां खड़ी एंबुलेंस से बीजापुर जिला अस्पताल पहुंचाकर भर्ती कराया गया।


मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना था एकमात्र लक्ष्य

ईएमटी राजेश वल्पदास ने बताया कि रात का अंधेरा, लगातार बारिश, नदी में बढ़ा जलस्तर और खराब सड़क बड़ी चुनौती थी। टॉर्च की रोशनी में पूरे रास्ते पैदल चलकर मरीज को सुरक्षित निकालना आसान नहीं था, लेकिन टीम का एक ही लक्ष्य था कि समय पर मरीज को अस्पताल पहुंचाना।

सड़क नहीं, फिर भी नहीं रुकी सेवा

  • बीजापुर के कई गांव आज भी बारिश में सड़क संपर्क से कट जाते हैं। ऐसे हालात में 108 एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, लेकिन कई बार स्वास्थ्यकर्मी वाहन छोड़कर पैदल ही मरीजों तक पहुंचते हैं।
  • रायगुडा की घटना भी इसी समर्पण की मिसाल बनी, जहां सड़क ने साथ नहीं दिया, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों और ग्रामीणों की टीमवर्क ने एक मरीज की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभाई। साथ ही यह घटना इस जरूरत को भी रेखांकित करती है कि दुर्गम इलाकों में हर मौसम में चलने योग्य सड़कें और स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जाएं।

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