
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। कोटा क्षेत्र के बेलगहना में रहने वाली बालकुंवर बसोर ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी और जमीन वापस दिलाने की मांग को लेकर पुलिस से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक गुहार लगाई। कार्रवाई नहीं होने से निराश महिला ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को इच्छा मृत्यु की अनुमति देने का आवेदन भी भेजा।
महिला का आरोप है कि उसके दूर के रिश्तेदार ने धोखे से उसके बैंक खाते से 23 लाख रुपये निकलवा लिए और करीब 6.50 एकड़ जमीन भी अपने नाम करा ली। आईजी और एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश के बाद बेलगहना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बेलगहना निवासी बालकुंवर बसोर (86) ने आईजी कार्यालय में दिए आवेदन में बताया कि केंदा निवासी फागुन प्रजापति (पिता हरिसिंह) बेटे की मौत के बाद रिश्तेदारी का हवाला देकर उनके घर आता-जाता था। महिला के अनुसार, 14 दिसंबर 2021 को उसने कहा कि पेंशन खाते से संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के लिए बैंक चलना होगा और आधार कार्ड समेत जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। आरोप है कि इसी दौरान उनके खाते में जमा 23 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर करा लिए गए।
महिला ने बताया कि बाद में धान बिक्री और रकम के लेन-देन में परेशानी का हवाला देकर उन्हें कोटा ले जाया गया। वहां ग्राम लुफा स्थित उनकी जमीन खसरा नंबर 763 रकबा 4.40 एकड़ और खसरा नंबर 991 रकबा 1.94 एकड़ को पावर ऑफ अटॉर्नी कराने के नाम पर अपने नाम रजिस्ट्री करा ली गई। जब उन्हें पैसों की जरूरत पड़ी और बैंक पहुंचीं, तो खाते में राशि नहीं मिली। वहीं सहकारी बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि पिछले तीन वर्षों से उनके नाम पर धान बिक्री भी दर्ज नहीं है। जांच करने पर यह भी सामने आया कि जमीन उनके नाम से हट चुकी है।
महिला ने बताया कि पहले बेलगहना चौकी में शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर एसपी कार्यालय पहुंचीं। इसके बाद जांच एसडीओपी कोटा को सौंपी गई। उनका आरोप है कि दस्तावेज और साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद पुलिस ने धारा 155 के तहत कार्रवाई कर न्यायालय जाने की सलाह दी। महिला का कहना है कि रजिस्ट्री दस्तावेज में चेक के माध्यम से भुगतान दिखाया गया है, लेकिन राशि उनके खाते में कभी नहीं आई। उनका आरोप है कि पूरे मामले में धोखाधड़ी और षड्यंत्र कर जमीन व रकम हड़प ली गई और एफआईआर दर्ज करने के बजाय आरोपित को बचाने की कोशिश की गई।
महिला ने कहा कि पति और बच्चों की जीवनभर की कमाई चली गई है और यदि न्याय नहीं मिला तो उनके पास जीवन समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। आईजी कार्यालय में शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और बेलगहना पुलिस ने भादवि की धारा 420 के तहत जुर्म दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
बालकुंवर बसोर का कहना है कि रिश्तेदारी और भरोसे का लाभ उठाकर फागुन प्रजापति ने उनकी आर्थिक सुरक्षा खत्म कर दी। उनके मुताबिक, पहले बैंक खाते से 23 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए और बाद में जमीन संबंधी कागजों के नाम पर करीब 6.50 एकड़ भूमि अपने नाम करा ली गई।
महिला का कहना है कि उनकी अशिक्षा का फायदा उठाकर पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया गया। जब तक उन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी मिली, तब तक बैंक राशि और जमीन दोनों उनके हाथ से निकल चुकी थीं। अब वह अपनी संपत्ति वापस पाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रही हैं।
बालकुंवर बसोर ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पर्याप्त दस्तावेज और साक्ष्य होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री में जिस चेक का उल्लेख है, उसकी राशि उन्हें नहीं मिली। महिला ने कहा कि मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उन्हें न्यायालय जाने की सलाह दी गई।
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इसके बाद उन्होंने आईजी कार्यालय में शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की। साथ ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को इच्छा मृत्यु का आवेदन भेजकर कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो जीवन जीने का कोई कारण नहीं बचेगा। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की।
वृद्ध महिला ने बताया कि उनका बेटा रमेश ठेकेदारी का काम करता था। बेटे की तबीयत खराब होने पर फागुन प्रजापति इलाज के लिए अस्पताल ले जाने में मदद करता था। इलाज के दौरान बेटे की मौत हो गई। महिला का आरोप है कि बेटे की मौत के बाद भी वह घर आता-जाता रहा और भरोसे का फायदा उठाकर बेटे की कार, एक्टिवा और मालवाहक वाहन भी अपने नाम करा लिया।