
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। नगर निगम में अधोसंरचना मद के तहत स्वीकृत 1191 करोड़ 16 लाख रुपये के 541 विकास कार्यों में से आधे भी पूरे नहीं हो पाए हैं। शहर के विकास के लिए मिले बजट से अब तक केवल 250 काम पूरे कराए गए हैं, जबकि 291 कार्य अधूरे हैं। इनमें 244 को प्रगतिरत और 47 को अप्रारंभ बताया गया है।
अधूरे कार्यों में तिफरा, सकरी, सिरगिट्टी, मोपका, कोनी और पुराने शहर की कालोनियों में डामरीकरण, आरसीसी नाली, पाइपलाइन विस्तार और पुलिया निर्माण जैसे जरूरी काम शामिल हैं। निगम के आंकड़ों के अनुसार, 15 कार्यों में स्थल परिवर्तन करना पड़ रहा है। 16 कार्य महीनों से टेंडर प्रक्रिया में अटके हैं।
पांच काम ले-आउट, तीन कालोनियों के विरोध और एक-एक काम सीमांकन व नाली निर्माण के कारण रुका है। अधोसंरचना मद के 47 अप्रारंभ कार्यों में आंतरिक सीसी सड़कें, प्रमुख नालों का आरसीसी निर्माण और जंक्शन सुधार जैसे काम भी शामिल हैं। कुछ कार्यों के लिए स्थल तय किए बिना स्वीकृति दिए जाने से अब जगह बदलनी पड़ रही है। वहीं, 16 कार्यों की निविदाएं री-टेंडर में उलझी हैं। तीन कार्य एमआईसी और सामान्य सभा में दर अनुमोदन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
कागजों में प्रगतिरत 244 कार्यों की धीमी चाल से भी लोगों की परेशानी बढ़ी है। कई सड़कों पर गिट्टी डालकर काम छोड़ दिया गया है। ठेकेदार भुगतान में देरी और तकनीकी अड़चनों का हवाला देकर काम बंद कर रहे हैं। पार्षदों और नागरिकों का आरोप है कि निगरानी के अभाव में ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। बजट आवंटित होने के बावजूद लोग जर्जर सड़कों, धूल और कीचड़ से जूझ रहे हैं। तय समय-सीमा बीतने पर भी लापरवाह ठेकेदारों पर पेनाल्टी लगाने या उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई नहीं हुई है।
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रिवर व्यू से व्यापार विहार तक, सीवरेज और सड़कों की मरम्मत दरकार
शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र व्यापार विहार की एप्रोच रोड और अरपा नदी किनारे बने रिवर व्यू रोड के आसपास बारिश के बाद डामर उखड़ चुका है। इन व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में जल निकासी के लिए पक्की आरसीसी नालियों और सीवरेज संधारण का काम लंबे समय से अटका है। भारी वाहनों की आवाजाही के बीच धूल और गड्ढों के कारण व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
कास्ट एस्केलेशन का खतरा, देरी से बढ़ेगा निर्माण का वित्तीय बोझ
निर्माण परियोजनाओं में महीनों की देरी से निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट, सरिया और डामर की दरें लगातार बढ़ रही हैं। तकनीकी जानकारों के अनुसार तय समय-सीमा पर काम न होने से प्रोजेक्ट्स में रिवाइस्ड एस्टीमेट (लागत वृद्धि) का पेंच फंसेगा। नतीजतन जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे और ठेकेदारों के साथ दर विवाद बढ़ने से काम और लंबा खिंच जाएगा।