
नईदुनिया प्रतिनिधि बिलासपुर। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए करोड़ों रूपये खर्च किए जा रहे है। शहर की सुंदरीकरण के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों-करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। शहर के सबसे व्यस्ततम और प्रमुख महाराणा प्रताप चौक पर स्थित फ्लाईओवर के नीचे की हरियाली अब पूरी तरह उजाड़ हो चुकी है। कभी हरा-भरा और आकर्षक दिखने वाला यह हिस्सा अब केवल रेत और मिट्टी के धूल भरे मैदान में तब्दील हो गया है।
नगर निगम प्रशासन की घोर लापरवाही और अनदेखी की वजह से यहां लगाए गए महंगे पौधे और हरी घास पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे चौक की सुंदरता खत्म हो चुकी है। मालूम हो कि कुछ समय पहले नगर निगम ने महाराणा प्रताप चौक फ्लाईओवर के नीचे के खाली पड़े हिस्से को आकर्षक रूप देने के लिए एक बड़ी योजना तैयार की थी। इसके तहत यहां चारों ओर रंग-बिरंगे फूल वाले पौधे, इनडोर प्लांट्स और हरी-भरी घास लगाई गई थी।
रात के वक्त इस जगह को खूबसूरत दिखाने के लिए कंक्रीट के पिलरों और पौधों के बीच रंग-बिरंगी और आकर्षक लाइटिंग भी की गई थी। शुरुआत में यह नजारा राहगीरों को अपनी ओर आकर्षित करता था, लेकिन निगम की बनाओ और भूल जाओ की नीति के कारण चंद महीनों में ही यह पूरी व्यवस्था जमींदोज हो गई।
न पानी मिला, न रखरखाव
स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि पौधों को लगाने के बाद नगर निगम के उद्यान विभाग ने कभी मुड़कर नहीं देखा। भीषण गर्मी के इस दौर में पौधों और घास को नियमित रूप से पानी देने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। पानी के अभाव में धीरे-धीरे सभी पौधे सूख गए और हरी घास गायब हो गई। अब वहाँ सिर्फ सूखी मिट्टी और रेत बची है, जो तेज हवा चलने पर उड़कर राहगीरों की आंखों में पड़ती है।
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जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई
शहर के सुंदरीकरण के नाम पर जनता के टैक्स के पैसे का यह सरासर दुरुपयोग है। जब पौधों को पानी देने और लाइटिंग की सुरक्षा की व्यवस्था नहीं थी, तो लाखों रुपये क्यों खर्च किए गए? इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसा मांग आसपास के रहवासी कर रहे है।
गायब हो गई आकर्षक लाइटिंग, अंधेरे का साम्राज्य
पौधों के साथ-साथ फ्लाईओवर के नीचे की गई आकर्षक लाइटिंग का भी अब कोई अतापता नहीं है। देखरेख और सुरक्षा के अभाव में या तो असामाजिक तत्वों ने कीमती लाइटें निकाल ली हैं या फिर वे तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी हैं। रात होते ही यह पूरा हिस्सा अंधेरे के आगोश में समा जाता है। रोशनी न होने की वजह से अब यहां रात के समय असामाजिक तत्वों और नशेडियों का जमावड़ा लगने लगा है, जिससे चौक से गुजरने वाले राहगीरों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।