
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मेंटेनेंस में बरती गई मामूली लापरवाही निर्दोष श्रमिकों-कर्मचारियों के लिए काल साबित होती है। पावर और स्टील प्लांटों के बायलर के भीतर का तापमान 1,100 से 1,500 डिग्री सेल्सियस तक रहता है, जो लोहे जैसी कठोर धातु को भी तरल बनाने की क्षमता रखता है। इतनी प्रचंड ऊष्मा के बीच भाप का अनियंत्रित दबाव किसी भी कमजोर ढांचे को फाड़कर भीषण विस्फोट का रूप ले लेता है।
हाल के वर्षों में प्रदेश में हुए बड़े हादसों की जांच रिपोर्टों ने भी इस कड़वे सच की पुष्टि की है कि समय पर तकनीकी सुधार न करना ही सबसे बड़ी चूक रही है। मरम्मत और रखरखाव की यही छोटी सी कोताही न केवल संयंत्रों को मलबे में तब्दील कर रही है, बल्कि अपनों को खोने वाले परिवारों के जीवन में एक ऐसी कभी न खत्म होने वाली हूक और पीड़ा छोड़ गई है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
जनवरी 2026 - रियल इस्पात, बलौदाबाजार-भाटापारा: बकुलाही स्थित स्टील प्लांट के डस्ट सेटलिंग चेंबर (डीएससी) में विस्फोट से गर्म राख गिरने के कारण 17 मजदूरों की मौत हुई। जांच रिपोर्ट के अनुसार, चेंबर के भीतर हॉट डस्ट और गैसों का दबाव मानक स्तर से अधिक हो गया था और चेंबर की बनावट इसे झेलने में सक्षम नहीं थी। हादसे के समय सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई और मजदूरों को बिना विशेष सुरक्षा कवच के संवेदनशील क्षेत्र में तैनात किया गया था।
मई 2024 - स्काई अलायज, रायगढ़-खरसिया: प्लांट में बायलर फटने और गर्म लावे की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मृत्यु हुई। रिपोर्ट के अनुसार, फर्नेस के भीतर अचानक दबाव अनियंत्रित हो गया था और सुरक्षा उपकरण काम नहीं कर पाए। जांच में पाया गया कि फिटनेस चेक में कोताही बरती गई थी और पाइपलाइन की थिकनेस जांचने में चूक हुई थी।
अक्टूबर 2018 - भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी): कोक ओवन गैस पाइपलाइन के पास बायलर जैसा भीषण विस्फोट होने से 14 लोगों की मृत्यु हुई। जांच समिति के अनुसार, मरम्मत के दौरान गैस के दबाव और निकासी का सही प्रबंधन नहीं किया गया था। वहां पर्याप्त सुरक्षा घेरा और फायर वाच की कमी थी तथा सुरक्षा उपकरण समय पर काम नहीं कर पाए।
बायलर मूल रूप से एक बंद तंत्र है, जहां पानी को उच्च ताप और अत्यंत उच्च दबाव पर भाप में बदला जाता है। इसके फटने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
पानी का स्तर कम होना - यदि बायलर के भीतर पानी का स्तर निश्चित सीमा से कम हो जाए, तो धातु अत्यधिक गर्म हो जाती है। अचानक ठंडा पानी आने पर वह तुरंत भाप में बदलता है और बढ़ा हुआ दबाव बायलर को फाड़ देता है।
सेफ्टी वाल्व की विफलता - हर बायलर की एक 'डिजाइन प्रेशर' सीमा होती है। यदि सेफ्टी वाल्व जाम हो जाए, तो भाप का दबाव सुरक्षित सीमा से बाहर चला जाता है, जो विस्फोट का कारण बनता है।
धातु का क्षरण और स्केल जमना - पानी की अशुद्धियों से पाइपों पर नमक की परत जमने से गर्मी पानी तक सही से नहीं पहुंचती, जिससे धातु बाहर से जलने लगती है। साथ ही, ऑक्सीजन और रसायनों के कारण जंग लगने से धातु पतली और कमजोर हो जाती है।
स्ट्रक्चरल दरारें - लगातार गर्म और ठंडा होने की प्रक्रिया से धातु में सूक्ष्म दरारें आ जाती हैं। समय पर 'स्ट्रक्चरल ऑडिट' न होने पर यह धातु अचानक जवाब दे देती है।
तकनीकी कारणों के अलावा मानवीय लापरवाही भी हादसों की बड़ी वजह है। इसमें सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच न करना, प्रशिक्षण के अभाव में ऑपरेटर द्वारा चेतावनी संकेतों को अनदेखा करना या गलत रीडिंग पढ़ना शामिल है। इसके अतिरिक्त, अधिक उत्पादन के लालच में बायलर को उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक तापमान पर चलाना भी जानलेवा साबित होता है।