
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने फर्जी पुलिसकर्मी बनकर दो युवकों को बंधक बनाने, धमकाने और पैसे वसूलने के आरोपित की एफआइआर रद करने की याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि मामला गंभीर है, जिसमें प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का होना स्पष्ट है, इसलिए प्रारंभिक स्तर पर जांच को रोकना उचित नहीं होगा।
यह मामला तब शुरू हुआ जब सकरी थाना क्षेत्र की निवासी साक्षी जोशी ने 28 अप्रैल 2026 को सतीश मिश्रा और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि सतीश ने 20 से 24 फरवरी 2026 के बीच शिकायतकर्ता के बेटे मयंक जोशी और उसके दोस्त उज्ज्वल राणा को अपने घर बुलाया। आरोप है कि सतीश ने अपने घर पर कुछ अज्ञात लोगों को पुलिस अधिकारी बताकर दोनों युवकों को बंधक बना लिया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इसके बाद उन्हें पुलिस लिखी गाड़ियों में ले जाकर मोटी रकम वसूलने का प्रयास किया गया। पुलिस ने सतीश मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत मामला दर्ज किया।
मामले की जांच जारी, इसलिए एफआइआर नहीं होगी रद
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि एफआइआर झूठी और दुर्भावनापूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि मयंक और उज्ज्वल ने याचिकाकर्ता के घर से गहनों की चोरी की थी। राज्य शासन ने बताया कि बिलासपुर एसएसपी से शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा गया है। कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले की जांच चल रही है, इसलिए एफआइआर को रद नहीं किया जा सकता।
एसपी को सबूतों का ब्योरा पेश करने के निर्देश
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के दावों की सत्यता की जांच पुलिस की तफ्तीश और ट्रायल कोर्ट के ट्रायल के दौरान ही हो सकती है। इस मामले में एसपी को सभी सबूतों का ब्योरा कोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि एफआइआर में दर्ज विवरण से स्पष्ट रूप से एक गंभीर संज्ञेय अपराध का होना पाया जाता है, जिसकी विस्तृत विवेचना जरूरी है।
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