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ट्रेन में शराबी का मौत का खेल, चांदाफोर्ट से गोंदिया तक दहशत के 4 घंटे, वेनगंगा एक्सप्रेस 2 घंटे 42 मिनट लेट

यशवंतपुर-कोरबा वेनगंगा एक्सप्रेस में एक नशे में धुत युवक द्वारा मचाए गए उत्पात ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। चांदाफोर्ट से गोंदिया के...और पढ़ें

By Dhirendra Kumar SinhaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 11:32:14 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 11:32:14 PM (IST)
ट्रेन में शराबी का मौत का खेल, चांदाफोर्ट से गोंदिया तक दहशत के 4 घंटे, वेनगंगा एक्सप्रेस 2 घंटे 42 मिनट लेट
यात्रियों ने शराबी युवक को पकड़कर बाथरूम के पास बैठाया

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ आने वाली ट्रेन में रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था बेबस।
  2. यात्रियों का सामान फेंकने की कोशिश और भारी हंगामा।
  3. महिला और बच्चों के बीच बना रहा दहशत का माहौल।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: यशवंतपुर-कोरबा वेनगंगा एक्सप्रेस के एसी कोच बी-3 में बुधवार रात एक नशे में धुत युवक ने ऐसा हंगामा मचाया कि यात्रियों की नींद और चैन दोनों छिन गए। दरवाजे की सीढ़ी पर बैठकर पैर बाहर निकालना, गाली-गलौज और यात्रियों से बदसलूकी के बीच करीब चार घंटे तक उसे काबू में रखने की मशक्कत होती रही। महिला, बुजुर्ग और बच्चों के बीच दहशत का माहौल बना रहा।

समय शाम 5.51 बजे। ट्रेन नंबर 12251 में चांदाफोर्ट से मूल मरोडा के बीच युवक की हरकतें लगातार बढ़ती गईं। हाउस किपिंग स्टाफ ने उसे समझाकर अगले स्टेशन पर उतरने की मिन्नत की, लेकिन नशे में धुत युवक किसी की सुनने को तैयार नहीं था। वह कभी दरवाजे पर बैठकर पैर बाहर निकालकर अपशब्द बोलता तो कभी यात्रियों से बदसलूकी करता। बर्थ 17 और 18 पर बैठे यात्री सिद्धार्थ और प्रशांत ने टीटीई को बताया कि युवक उनका बैग ले गया था, जो हाउस किपिंग स्टाफ की मदद से मिला।


उनका आरोप था कि वह बैग को गेट से बाहर फेंकने की कोशिश कर रहा था। रात करीब आठ बजे टीटीई और हाउस किपिंग स्टाफ ने आरपीएफ की मदद से उसे वडसा स्टेशन में उतारने का प्रयास किया, लेकिन वहां की आरपीएफ ने उसे ट्रेन में वापस जाने दिया। इसके बाद उसका उत्पात और बढ़ गया। डिप्टी सीटीआई एएस खलको और मुख्य टिकट निरीक्षक एएस मिंज यात्रियों की सुरक्षा को लेकर लगातार आरपीएफ से संपर्क करते रहे।

स्थिति बिगड़ने पर स्टाफ और कुछ युवा यात्रियों ने उसे पकड़कर बाथरूम के पास बैठाया और सिर पर पानी डाला। किसी तरह उसे पेंट्रीकार तक ले जाया गया। रात करीब पौने 10 बजे गोंदिया में आरपीएफ के हवाले किए जाने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। हालांकि इस पूरे मामले में रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। रेलवे बेबस नजर आया।

दहशत के चार घंटे, हर मिनट भारी

चांदाफोर्ट से शुरू हुआ हंगामा गोंदिया पहुंचने तक यात्रियों के लिए लगातार तनाव का कारण बना रहा। करीब चार घंटे के इस घटनाक्रम में एसी कोच के यात्री सामान्य यात्रा तक नहीं कर सके। महिलाएं बाथरूम जाने से बचती रहीं, छोटे बच्चे सहमे रहे और बुजुर्ग तनाव में नजर आए। कुछ यात्रियों ने नाराजगी में युवक को ट्रेन से बाहर फेंकने तक की बात कही, लेकिन मारपीट नहीं हुई। कुछ यात्रियों ने कहा कि पहले वह सामान्य दिख रहा था। जांच में उसके पास एसी का टिकट भी नहीं था। कुछ चीजें लगातार बाहर फेंक रहा था। आखिरकार स्टाफ ने स्थिति संभाली और उसे आरपीएफ को सौंपा।

ट्रेन में शराब पर रेलवे का सख्त नियम

रेलवे में नशे की हालत में यात्रा करना केवल अनुशासनहीनता नहीं, दंडनीय कृत्य भी है। 19 जून 2026 से प्रभावी संशोधित रेल अधिनियम की धारा 145 के अनुसार, नशे में किसी को परेशान करने वाले यात्री को रेलवे कर्मचारी ट्रेन से उतार सकता है। ऐसे मामले में 24 घंटे तक साधारण कारावास, एक हजार रुपये तक जुर्माना, दोनों या सामुदायिक सेवा का प्रविधान है। उम्मीद है रेलवे इसे लेकर जल्द जानकारी देंगे।

खलको की सूझबूझ से टला बड़ा टकराव

डिप्टी सीटीआई एएस खलको ने पूरे घटनाक्रम में संयम बनाए रखते हुए यात्रियों और स्टाफ को साथ लेकर स्थिति संभाली। मुख्य टिकट निरीक्षक एएस मिंज भी लगातार उनके साथ रहे। दोनों ने आरपीएफ से संपर्क बनाए रखा, ताकि गुस्साए यात्री युवक पर हमला न कर दें।

हाउस किपिंग और पेंट्रीकार स्टाफ के साथ युवा यात्रियों की मदद लेकर नशेड़ी को नियंत्रित किया गया। खास बात यह रही कि यात्रियों में भारी आक्रोश के बावजूद किसी तरह की मारपीट नहीं हुई।