10 बार सर्विसिंग के बाद भी इलेक्ट्रिक कार में खराबी, टाटा मोटर्स को करना होगा 16.25 लाख का भुगतान
बिलासपुर के डॉक्टर स्वप्न कुमार दत्ता द्वारा खरीदी गई टाटा पंच ईवी कार में बार-बार तकनीकी खराबी और कम बैटरी रेंज जैसी समस्याओं से परेशान होकर जिला उपभ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 10:53:47 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 10:53:47 PM (IST)
HighLights
- 10 बार सर्विसिंग के बाद भी इलेक्ट्रिक कार में तकनीकी खराबी।
- राज्य उपभोक्ता आयोग ने खारिज की टाटा मोटर्स की अपील।
- कंपनी को चुकानी होगी वाहन की पूरी कीमत 16.25 लाख रुपये।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: इलेक्ट्रिक कार में बार-बार तकनीकी खराबी आने और सर्विसिंग के बाद भी समस्याएं दूर नहीं होने पर छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने टाटा मोटर्स को वाहन की पूरी कीमत लौटाने का आदेश बरकरार रखा है। बिलासपुर के डा. स्वप्न कुमार दत्ता की शिकायत पर जिला उपभोक्ता आयोग ने कार की कीमत 16 लाख 25 हजार 604 रुपये लौटाने के साथ मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय देने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ कंपनी की अपील राज्य आयोग ने खारिज कर दी।
डा. स्वप्न कुमार दत्ता ने बिलासपुर में समाधान नर्सिंग होम के पास अपने निवास से संबंधित पते पर रहते हुए जेडी आटोनेशन से टाटा पंच ईवी (इम्पावर्ड प्लस एस एलआर एसीएफसी) खरीदी थी। इसके लिए उन्होंने 16,25,604 रुपये चुकाए थे। खरीद के कुछ समय बाद ही कार में कई तरह की समस्याएं सामने आने लगीं। कार का वातानुकूलन तंत्र ठीक से काम नहीं करता था।
तकनीकी खामियां और सर्विसिंग
वेंटिलेटेड सीट में भी खराबी थी। कंपनी ने एक बार चार्ज करने पर 421 किलोमीटर तक चलने का दावा किया था, लेकिन डाक्टर के अनुसार कार 200 किलोमीटर भी नहीं चल पा रही थी। इलेक्ट्रानिक प्रणाली में गड़बड़ी, सेंसर की खराबी और चलते-चलते वाहन बंद होने जैसी समस्याओं के कारण कार को करीब 10 बार सर्विसिंग केंद्र ले जाना पड़ा। इसके बावजूद परेशानी दूर नहीं हुई।
जिला आयोग का फैसला
डाक्टर ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। जिला आयोग ने शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए टाटा मोटर्स को वाहन की पूरी कीमत 16,25,604 रुपये लौटाने का आदेश दिया था। इसके अलावा मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 25 हजार रुपये और वाद व्यय के लिए 10 हजार रुपये देने को कहा था।
निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का प्रविधान भी किया गया था। इस फैसले को टाटा मोटर्स ने राज्य आयोग में चुनौती दी। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों और वाहन की सर्विसिंग से जुड़े दस्तावेजों की जांच की।
राज्य आयोग की मुहर
आयोग ने पाया कि वाहन में बार-बार गंभीर तकनीकी समस्याएं सामने आईं, लेकिन कंपनी या डीलर ऐसा विशेषज्ञ अभिमत अथवा साक्ष्य पेश नहीं कर सके, जिससे इन शिकायतों को गलत साबित किया जा सके। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए कंपनी की अपील खारिज कर दी और जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा। इस तरह कंपनी को वाहन की पूरी कीमत के साथ निर्धारित क्षतिपूर्ति और वाद व्यय देने होंगे।