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एक ठेके की कथित वसूली दूसरे बिल से नहीं कर सकती सरकार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 84 लाख ब्याज सहित लौटाओ

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 7 जनवरी 2026 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सरकार द्वारा एक ठेके की कथित गड़बड़ी की वसूली दूसरे नए ठेके क...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 10:36:04 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 10:36:04 PM (IST)
एक ठेके की कथित वसूली दूसरे बिल से नहीं कर सकती सरकार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 84 लाख ब्याज सहित लौटाओ

HighLights

  1. एक ठेके की वसूली दूसरे बिल से करना अवैध: सुप्रीम कोर्ट।
  2. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का 7 जनवरी 2026 का आदेश किया निरस्त।
  3. ठेकेदार को 84.17 लाख रुपये 6% ब्याज सहित लौटाने का निर्देश।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी पुराने ठेके में कथित अधिक भुगतान या अनियमितता की वसूली के लिए सरकार दूसरे और अलग ठेके के चालू बिल से मनमाने ढंग से राशि नहीं काट सकती। जस्टिस पमिडीघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मेसर्स अवधेश सिंह गौतम की अपील स्वीकार करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का 7 जनवरी 2026 का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने 84,17,003 रुपये की काटी गई राशि 27 सितंबर 2025 से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया।

पुराने काम में 2.01 करोड़ अधिक भुगतान का दावा

दंतेवाड़ा जिले में वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत फर्म को दो सड़कों का ठेका मिला था। जनवरी 2024 में तकनीकी जांच समिति ने करीब 2.01 करोड़ रुपये अधिक भुगतान किए जाने का दावा किया। इसके बाद छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी ने फर्म के वर्ष 2023-24 के तीन अलग-अलग नए कामों के चालू बिलों से 84.17 लाख रुपये काट लिए। फर्म ने इस वसूली को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन तीनों याचिकाएं खारिज होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।


बिना सुनवाई सीधे कटौती को माना गलत

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि संबंधित अनुबंध की शर्तों के अनुसार तकनीकी जांच के बाद वसूली से पहले ठेकेदार को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना जरूरी था। साथ ही मुख्य कार्यपालन अधिकारी, छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी का लिखित आदेश भी आवश्यक था। इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक अनुबंध से जुड़ी कथित देनदारी को दूसरे स्वतंत्र और चालू अनुबंध के बिल से अपने आप समायोजित नहीं किया जा सकता। बिना नोटिस और सुनवाई के सीधे राशि काटना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

पुरानी जांच और आपराधिक मामले पर असर नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि फैसला केवल 84.17 लाख रुपये की कटौती की प्रक्रिया की वैधानिकता से संबंधित है। पुराने काम में अधिक भुगतान की विभागीय जांच या ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। राज्य कानून के अनुसार अलग से कार्रवाई कर सकता है।