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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से पशु चिकित्सा डिप्लोमा छात्रों को बड़ी राहत, 5 नवंबर तक पंजीयन के निर्देश

बिलासपुर हाई कोर्ट ने पशु चिकित्सा डिप्लोमा के विद्यार्थियों को राहत देते हुए राज्य शासन और विश्वविद्यालय को 5 तथा 6 नवंबर को पंजीयन पूरा करने का निर्देश दिया है।

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Mon, 02 Nov 2026 10:59:11 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Nov 2026 10:59:11 PM (IST)
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से पशु चिकित्सा डिप्लोमा छात्रों को बड़ी राहत, 5 नवंबर तक पंजीयन के निर्देश

HighLights

  1. बिलासपुर हाई कोर्ट से 7 डिप्लोमा छात्रों को मिली बड़ी राहत।
  2. 5 और 6 नवंबर को पंजीयन प्रक्रिया पूरी कराने के आदेश।
  3. याचिकाओं पर अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को होगी।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। दो वर्षीय पशु चिकित्सा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा और पशुपालन डिप्लोमा पाठ्यक्रम में पढ़ाई जारी रखने की अनुमति के मामले में हाई कोर्ट ने मनोहर यादव सहित सात विद्यार्थियों को राहत दी है।

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने 30 अक्टूबर को राज्य शासन को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों का पंजीयन 5 नवंबर 2026 तक पूरा कराने की अनुमति दी जाए। वहीं, संबंधित विश्वविद्यालय को पंजीयन की तारीख बढ़ाकर 5 और 6 नवंबर को प्रक्रिया पूरी कराने कहा है। यह अंतरिम व्यवस्था विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए की गई है।

मामला मनोहर यादव और उससे जुड़ी छह अन्य याचिकाओं का है। 13 अगस्त 2026 को जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने संतोषपुर बीजापुर निवासी मनोज कुमार सहित कई याचिकाओं का निराकरण करते हुए याचिकाकर्ताओं को पशु चिकित्सा पालिटेक्निक डिप्लोमा और पशुपालन डिप्लोमा पाठ्यक्रम जारी रखने की अनुमति देने के निर्देश दिए थे।


13 अगस्त के आदेश में अदालत ने पाया था कि याचिकाकर्ताओं को पाठ्यक्रम में अनंतिम प्रवेश मिल चुका था और वे दो सेमेस्टर की पढ़ाई भी पूरी कर चुके थे। इसी दौरान समान परिस्थितियों वाले कुछ अन्य अभ्यर्थियों को पाठ्यक्रम जारी रखने की अनुमति दे दी गई थी।

अदालत ने माना कि ऐसे में याचिकाकर्ताओं को पढ़ाई से वंचित करने पर उनकी अब तक की शैक्षणिक उपलब्धि बेकार हो सकती है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों के अनुमति नहीं देने वाले आदेश याचिकाकर्ताओं के संबंध में निरस्त कर दिए थे।

राज्य शासन को निर्देश दिया था कि 30 जुलाई 2026 को बनाई गई नीति और समान परिस्थितियों वाले अभ्यर्थियों के मामलों को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम जारी रखने की अनुमति दी जाए। उन्हें परीक्षा में शामिल कराने सहित जरूरी कदम उठाने और आदेश की प्रति मिलने के दो सप्ताह के भीतर प्रक्रिया पूरी करने कहा गया था। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया था कि यह राहत मामले की विशेष परिस्थितियों तक सीमित रहेगी और इसे सामान्य नियम या अन्य मामलों में मिसाल नहीं माना जाएगा।

आदेश के पालन के बजाय अपील करने का निर्णय

30 अक्टूबर को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता गगन तिवारी ने बताया कि 13 अगस्त के आदेश का पालन नहीं किया गया है। इस संबंध में अवमानना याचिका भी दायर की गई है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी हो चुके हैं।

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता वाईएस ठाकुर ने बताया कि शासन ने 13 अगस्त के आदेश को चुनौती देने के लिए रिट अपील दायर करने का निर्णय लिया है। इसी वजह से विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम जारी रखने की अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, सुनवाई के दिन तक किसी सक्षम न्यायालय में अपील दाखिल नहीं हुई थी।

पंजीयन की सीमित अवधि को देखते हुए अंतरिम निर्देश

विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि 15 अक्टूबर के पत्र के माध्यम से पंजीयन का कार्यक्रम जारी किया गया था, जिसके तहत 29 और 30 अक्टूबर को पंजीयन होना था। अदालत ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों का अब तक पालन नहीं हुआ है और पंजीयन की अवधि भी सीमित है। उच्च शिक्षा से जुड़े इस मामले में विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए अंतरिम व्यवस्था जरूरी है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने राज्य शासन को 5 नवंबर तक विद्यार्थियों का पंजीयन कराने की अनुमति देने और विश्वविद्यालय को 5 व 6 नवंबर को पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। सभी संबंधित याचिकाओं पर अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को होगी।

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