
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। औद्योगिक क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती, बार-बार ट्रिपिंग और बिना पूर्व सूचना के शटडाउन ने उद्योगों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। बिजली की आंखमिचौली से उत्पादन प्रभावित होने के साथ उद्योगपतियों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। लगातार बिगड़ती विद्युत व्यवस्था से परेशान सिलपहरी, सिरगिट्टी और तिफरा के 50 से अधिक उद्योगपतियों ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य अभियंता कार्यालय पहुंचकर अपनी नाराजगी जताई।
उद्योगपतियों ने अधिकारियों के सामने समस्याएं रखते हुए व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की। इस पर कार्यकारी निदेशक आलोक अंबस्ट ने एक माह के भीतर समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए। बैठक में छत्तीसगढ़ लघु उद्योग संघ के प्रदेश अध्यक्ष हरीश केडिया, जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष सतीश शाह और महासचिव शरद सक्सेना के नेतृत्व में उद्योगपतियों का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा था।
इसमें सिलपहरी, सिरगिट्टी सेक्टर ए, बी, सी और तिफरा के उद्योग संचालक शामिल हुए। उद्योगपतियों ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्रों में दिनभर में 10 से 15 बार या इससे भी अधिक ट्रिपिंग हो रही है। कई बार बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली बंद कर दी जाती है।
दिन में कई बार अचानक शटडाउन लेने से उत्पादन प्रक्रिया बाधित होती है। इसके अलावा जम्पर टूटने, डीओ गिरने और फ्यूज संबंधी शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं किया जाता। सुधार कार्य में देरी के कारण उद्योगों को लंबे समय तक बिजली संकट झेलना पड़ता है। कार्यकारी निदेशक अलोक अम्बस्ट, एसई सुरेश जांगड़े, पीएल सिदार, डीई अनुपम सरकार, एई दीपतेन मुखर्जी के अलावा उद्योग संघ के पदाधिकारी और 50 से अधिक उद्योगपति मौजूद रहे।
उद्योगपतियों ने बताया कि आयल मिल, दाल मिल, प्लास्टिक उद्योग और अन्य सतत उत्पादन वाली इकाइयों में अचानक बिजली बंद होने से मशीनों का संचालन प्रभावित होता है। इससे तैयार माल और कच्चे माल को नुकसान पहुंचने के साथ उत्पादन भी ठप हो जाता है। सिलपहरी के बड़े उद्योग अघोषित कटौती से विशेष रूप से परेशान हैं। करोड़ों रुपये का राजस्व देने के बावजूद औद्योगिक क्षेत्रों को निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है। उद्योगपतियों ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई।