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लीलागर नदी में उफान: कोनारगढ़-कुटीघाट पुल डूबा, आवागमन बंद; धनुहार डेरा समेत कई बस्तियों में घुसा पानी

जांजगीर-चंपा जिले के मुलमुला क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण लीलागर नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से धनुहार डेरा, कोनारगढ़ ...और पढ़ें

By komal ShuklaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Mon, 20 Jul 2026 02:02:54 PM (IST)Updated Date: Mon, 20 Jul 2026 02:02:54 PM (IST)
लीलागर नदी में उफान: कोनारगढ़-कुटीघाट पुल डूबा, आवागमन बंद; धनुहार डेरा समेत कई बस्तियों में घुसा पानी
कैप्शन : बाढ़ का पानी कम होने के बाद कीचड़ से सराबोर ग्राम की सड़क

HighLights

  1. लीलागर नदी में आई बाढ़ से धनुहार डेरा, कोनारगढ़ और कुटीघाट प्रभावित, जनजीवन अस्त-व्यस्त
  2. पुल के ऊपर से बह रहा पानी; पुलिस ने लगाए बैरिकेड्स, फिर भी उमड़ रही भीड़
  3. सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न, संपर्क मार्ग टूटने से कई गांव टापू में तब्दील

नईदुनिया न्यूज, मुलमुला। क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लगातार हो रही भारी वर्षा के चलते लीलागर नदी उफान पर आ गई है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण आसपास के कई गांव और बस्तियां बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। धनुहार डेरा, कोनारगढ़ और कुटीघाट क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं, जहां लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

बढ़ते जलस्तर के कारण कोनारगढ़ और कुटीघाट को जोड़ने वाले पुल के ऊपर से पानी बहने लगा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से पुल पर आवागमन बंद कर दिया है। पुल के दोनों ओर बैरिकेड लगाकर लोगों और वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। इसके बावजूद कई लोग बाढ़ का नजारा देखने के लिए पहुंच रहे हैं, जिन्हें पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार समझाइश दी जा रही है। बाढ़ के चलते निचले इलाकों में स्थित खेतों और ग्रामीण मार्गों में पानी भर गया है।


कई स्थानों पर संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की चिंता भी बढ़ गई है, क्योंकि खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबने लगी हैं। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। राजस्व, पुलिस तथा आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर हैं। संभावित खतरे को देखते हुए ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदी-नालों के आसपास नहीं जाने की सलाह दी गई है।

साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार लीलागर नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और नदी का तेज बहाव चिंता का विषय बना हुआ है। मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में भी बारिश की संभावना जताई गई है, जिसके कारण बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने का आग्रह किया है। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रशासन द्वारा हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।

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