पढ़ाई और नौकरी के नाम पर वैवाहिक जिम्मेदारियों से दूर रहना मानसिक क्रूरता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिना उचित कारण पति व सास से अलग रहने और वैवाहिक दायित्व न निभाने को मानसिक क्रूरता मानते हुए परिवार न्यायालय के तलाक के फैसले को बरकरार रखा है।
Publish Date: Thu, 05 Nov 2026 09:08:32 PM (IST)Updated Date: Thu, 05 Nov 2026 09:08:32 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- पति से बिना वजह अलग रहना मानसिक क्रूरता: हाई कोर्ट।
- डोंगरगढ़ के परिवार न्यायालय का तलाक का फैसला बरकरार।
- पढ़ाई-नौकरी के नाम पर अलग रहने वाली पत्नी की अपील खारिज।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा है कि बिना उचित कारण पति के साथ नहीं रहना और वैवाहिक दायित्वों का निर्वहन नहीं करना मानसिक क्रूरता है। इस आधार पर अदालत ने परिवार न्यायालय के तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी।
जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की पीठ ने पांच नवंबर को यह फैसला सुनाया। मामला राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ निवासी सिद्धार्थ जनबंधु और उनकी पत्नी ऐतिश्री के वैवाहिक विवाद से जुड़ा है। दोनों का विवाह एक जनवरी 2015 को हुआ था। उनका बेटा अद्विक मां के साथ रह रहा है। पति के अनुसार, पत्नी फिजियोथेरेपी की पढ़ाई करना चाहती थी। उसने पढ़ाई से नहीं रोका, बल्कि डोंगरगढ़ से ट्रेन से दुर्ग आने-जाने की सलाह दी, ताकि पारिवारिक जिम्मेदारियां भी निभाई जा सकें।
पत्नी ने बाद में बीकाम, पीजीडीसीए और एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई की और दुर्ग जिला अस्पताल में डाटा एंट्री आपरेटर की नौकरी की। पति का आरोप था कि वह डोंगरगढ़ में उसके साथ और सास के साथ रहने को तैयार नहीं थी। उसने दुर्ग के बजाय डोंगरगढ़ में समान वेतन पर नौकरी का विकल्प भी दिया था, जिसे पत्नी ने स्वीकार नहीं किया।
यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में धान खरीदी: 24 घंटे घर बैठे मिलेगा टोकन, किसान एप से करें आवेदन
पढ़ाई या पसंद की नौकरी से रोकने का प्रमाण नहीं
विवाद बढ़ने पर पति ने वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए आवेदन किया और पत्नी ने भरण-पोषण का मामला दायर किया। हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दोनों ने मामले वापस लेकर साथ रहने की कोशिश की, लेकिन विवाद जारी रहा।
पत्नी ने आरोपों से इन्कार करते हुए कहा कि पति ने उसे घर से निकाल दिया था और वह वैवाहिक संबंध बनाए रखने को तैयार थी। हाई कोर्ट ने कहा कि पति द्वारा पत्नी को पढ़ाई या पसंद की नौकरी से रोकने का प्रमाण नहीं है। पत्नी के पिता की गवाही से भी सामने आया कि विवाद के बाद पति उससे मिलने नियमित रूप से दुर्ग जाता था।
तलाक की डिक्री बरकरार
पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के नरेंद्र बनाम के. मीना फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बिना उचित कारण पति से अलग रहने और वैवाहिक जीवन से दूरी बनाए रखने का लगातार व्यवहार मानसिक क्रूरता हो सकता है। पत्नी के कथित विवाहेतर संबंध के आरोपों पर अदालत ने टिप्पणी नहीं की।
दुर्ग परिवार न्यायालय ने तीन अगस्त 2024 को मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक की डिक्री दी थी। हाई कोर्ट ने इसमें कोई अवैधता या त्रुटि नहीं पाई।