
नवदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। शिवतराई के पास स्थित सरैया रिसार्ट में एक दुर्लभ प्रजाति का गोल्डन ग्रीक कछुआ देखने को मिला। अलग तरह से दिखने वाले इस कछुए पर नजर पड़ते ही सुरक्षा के मद्देनजर रिसार्ट संचालक ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी। शिवतराई से वन अमला पहुंचा और रेस्क्यू कर साथ ले गया। कछुए को उनके रहवास के अनुकूल सुरक्षित स्थान पर छोड़ा गया है। यह पानी में नहीं रहता। इसलिए जहां बड़े-बड़े घास है, वहां छोड़ा गया।
ताज्जुब की बात यह है कि यह कछुआ भारत में नहीं पाया जाता। इसका रहवासी क्षेत्र उत्तरी अफ्रीका, दक्षिणी यूरोप और मध्य पूर्व के गर्म, शुष्क इलाके हैं। यहां कैसे पहुंचा, यह तो स्पष्ट नहीं है। माना जा रहा है कि किसी ने इसे पालने के लिए लाया होगा बाद में जंगल के आसपास छोड़ दिया। इसके बाद वह रिसार्ट के पास पहुंच गया।
हालांकि जब इसे रेस्क्यू किया गया, उसके बाद इसकी विस्तार से जानकारी खंगाली गई। इसी दौरान गोल्डन ग्रीक प्रजाति के रूप में पहचान हुई। गोल्डन ग्रीक कछुआ भूमध्यसागरीय कछुओं की एक लोकप्रिय प्रजाति है। यह पीले-सुनहरे रंग के आकर्षक खोल (शैल) के लिए जाने जाते हैं। इनका आकार लगभग चार से आठ इंच तक होता है। इनका मुख्य खोल हल्के पीले या सुनहरे रंग का होता है, जिस पर गहरे भूरे या काले रंग के निशान होते हैं।
गोल्डन ग्रीक कछुआ मुख्यत: शाकाहारी होता हैं। इनका मुख्य आहार ताज़ा घास, जंगली फूल, और हरी पत्तेदार सब्ज़ियां है। धूप के लिए 'बास्किंग लैंप' और विटामिन डी 3 के लिए 'यूवीबी लाइट' जरूरी है। इस प्रकार के प्रजाति का दुर्लभ कछुआ पहली बार देखने को मिला है।
वन विभाग के अधिकारियों ने सरैया रिसोर्ट के संचालक तथा कर्मचारियों को वन्य प्राणियों की सुरक्षा के प्रति इस सजगतापूर्ण कार्य के लिए प्रशंसा भी की। साथ ही यह कहा कि इस मौसम में जीव जंतु बाहर निकल कर आते हैं और विचरण करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है।