राजस्थान में थे अधिवक्ता उसी समय महिला ने दीवार तोड़ने व जान से मारने की धमकी देने की दर्ज कराई FIR, जारी रहेगा मानहानि का केस
Bilaspur news: झूठे आरोप लगाकर किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ बिलासपुर जिला न्यायालय ने एक अहम और नजीर बनने वाला फैस ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 28 May 2026 08:49:24 PM (IST)Updated Date: Thu, 28 May 2026 08:50:38 PM (IST)
HighLights
- तखतपुर का बहुचर्चित मानहानि मामला
- ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त
- अदालत में दस्तावेजों से खुली पोल
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। झूठे आरोप लगाकर किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ बिलासपुर जिला न्यायालय ने एक अहम और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश मनीषा ठाकुर की अदालत ने तखतपुर के बहुचर्चित मानहानि मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा परिवाद खारिज करने के आदेश को निरस्त कर दिया है।
अदालत ने माना कि बिना पर्याप्त आधार किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाना केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि मानहानि का गंभीर मामला हो सकता है।
मामला तखतपुर नगर के वार्ड क्रमांक-01 का
मामला तखतपुर नगर के वार्ड क्रमांक-01 का है। जनवरी 2021 में कंचन जायसवाल नामक महिला ने स्थानीय अधिवक्ता गिरीश मयाराम कश्यप के खिलाफ थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अधिवक्ता ने उनके घर की सुरक्षा दीवार तोड़ दी और विरोध करने पर अश्लील गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी दी।
इस शिकायत के बाद क्षेत्र में अधिवक्ता की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। पुलिसकर्मियों से लेकर स्थानीय लोगों और आसपास के व्यापारियों तक इस शिकायत की चर्चा होने लगी।
अदालत में दस्तावेजों से खुली शिकायत की पोल
अधिवक्ता गिरीश कश्यप ने खुद को झूठा फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए तखतपुर न्यायालय में भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत मानहानि का परिवाद दायर किया। उन्होंने अदालत में रेलवे टिकट और संग्रहालय (म्यूजियम) की रसीदों सहित कई दस्तावेज पेश किए।
इनसे यह साबित हुआ कि कथित घटना के दिन और समय पर वे छत्तीसगढ़ में मौजूद ही नहीं थे। रिकार्ड के अनुसार उस दौरान वे राजस्थान के कोटा में यात्रा कर रहे थे।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यह कहकर खारिज किया था परिवाद
तखतपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने यह कहते हुए परिवाद खारिज कर दिया था कि दोनों पक्ष पड़ोसी हैं और उन्होंने आपसी सहमति से विवाद समाप्त कर लिया है। लेकिन इस आदेश को अधिवक्ता गिरीश कश्यप ने जिला न्यायालय बिलासपुर में पुनरीक्षण याचिका दायर कर चुनौती दी।
राजीनामे का कोई रिकार्ड नहीं: सत्र न्यायालय
षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश मनीषा ठाकुर ने मामले के रिकार्ड का परीक्षण करने के बाद पाया कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष ऐसा कोई वैधानिक दस्तावेज मौजूद नहीं था, जिससे यह साबित हो सके कि दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता या राजीनामा हुआ था। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि रिकार्ड पर उपलब्ध दस्तावेज प्रथम दृष्टया मानहानि के मामले में संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत करते हैं।
कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने बिना पर्याप्त कारण परिवाद खारिज कर दिया, जो विधि सम्मत नहीं है। सत्र न्यायालय ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को पुनर्विचार और आगे की सुनवाई के लिए तखतपुर न्यायालय वापस भेज दिया है।