साल 2005 में 14 दिन की पैरोल पर जेल से निकला बाहर और हो गया फरार, 21 साल बाद चढ़ा पुलिस के हत्थे, हत्या के केस में मिली थी सजा
हत्या के मामले में दोषसिद्ध एक कैदी को दंतेवाड़ा पुलिस ने 21 वर्ष बाद गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 11 Jun 2026 08:15:52 PM (IST)Updated Date: Thu, 11 Jun 2026 08:24:42 PM (IST)
गिरफ्तार कैदी सोढ़ी मासा।HighLights
- केंद्रीय जेल जगदलपुर में सजा काट रहा था
- पुलिस से बचने के लिए नाम बदला
- विशेष टीम तेलंगाना पहुंची और धर दबोचा
नईदुनिया न्यूज, दंतेवाड़ा। हत्या के मामले में दोषसिद्ध एक कैदी को दंतेवाड़ा पुलिस ने 21 वर्ष बाद गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। वर्ष 2005 में 14 दिन की पैरोल पर केंद्रीय जेल जगदलपुर से बाहर आया यह कैदी निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद वापस जेल नहीं लौटा था।
इसके बाद वह तेलंगाना में पहचान बदलकर रह रहा था। लंबे समय से फरार चल रहे कैदी को विशेष अभियान के तहत गिरफ्तार कर पुनः जेल भेज दिया गया है।
केंद्रीय जेल जगदलपुर में सजा काट रहा था
पुलिस के अनुसार कटेकल्याण थाना क्षेत्र के डोंगरीपारा निवासी सोढ़ी मासा (45) वर्ष 2001 के हत्या प्रकरण में दोषसिद्ध होने के बाद केंद्रीय जेल जगदलपुर में सजा काट रहा था। वर्ष 2005 में उसे 14 दिनों की पैरोल मिली थी, लेकिन अवधि समाप्त होने के बाद भी वह जेल नहीं लौटा और फरार हो गया। तब से पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी।
पुलिस से बचने के लिए नाम बदला
फरारी के दौरान वह तेलंगाना के कोत्तागुडेम क्षेत्र के कासनपल्ली गांव में जाकर बस गया। पुलिस से बचने के लिए उसने अपना नाम बदलकर लालाराम सोढ़ी रख लिया और नई पहचान के साथ जीवन गुजारने लगा। दो दशक से अधिक समय तक वह पुलिस की नजरों से बचता रहा।
बेटे के गांव आने की मिली सूचना, पुलिस ने बनाई टीम
मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब पुलिस को सूचना मिली कि फरार कैदी का पुत्र हड़मा उर्फ सुरेश सोढ़ी गांव आया हुआ है। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी से पुलिस को उसके तेलंगाना में होने का सुराग मिला। सूचना की पुष्टि होने के बाद पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा के निर्देशन तथा एसडीओपी कटेकल्याण के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई।
विशेष टीम तेलंगाना पहुंची और धर दबोचा
विशेष टीम तेलंगाना पहुंची और स्थानीय स्तर पर पड़ताल के बाद उसकी पहचान सुनिश्चित कर गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे जगदलपुर लाकर प्रथम अपर सत्र न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायालय के आदेश पर उसे केंद्रीय जेल जगदलपुर भेज दिया गया।