
नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम तर्रागोंदी में मानवता को झकझोर देने वाला मामला प्रकाश में आया है। पुश्तैनी जमीन पर मकान निर्माण को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद इस हद तक बढ़ गया कि गांव के कुछ लोगों ने एक पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया है। उनका "हुक्का-पानी" बंद है। न्याय की आस में पीड़ित परिवार अब प्रशासनिक अधिकारियों की शरण में पहुंचा है।
पीड़ित 60 वर्षीय धनेश्वर साहू ने कलेक्टर जनदर्शन में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि उनके परिवार में कुल 30 सदस्य हैं। गत वर्ष परिवार में तीन विवाह संपन्न होने के कारण घर में रहने की जगह कम पड़ गई थी। इसके चलते वे अपनी निजी और पुश्तैनी भूमि पर नए मकान का निर्माण करवा रहे थे। राजस्व अभिलेखों में रिकॉर्ड सुधार के लिए भी उन्होंने आवेदन दे रखा है। लेकिन इस निर्माण कार्य को लेकर गांव में लगातार बैठकें आयोजित की गईं और सितंबर 2024 में पंचायत स्तर पर उन्हें पूरी तरह बहिष्कृत करने का फरमान सुना दिया गया।
गांव में यह कड़ा निर्देश जारी किया गया है कि जो भी व्यक्ति धनेश्वर साहू के परिवार से बातचीत करेगा, लेन-देन रखेगा या मजदूरी का काम करेगा, उस पर 51 हजार रुपये का भारी अर्थदंड लगाया जाएगा। इस प्रतिबंध के कारण परिवार का जीना मुहाल हो गया है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें दैनिक उपयोग का राशन लाने के लिए भी दूसरे गांवों का रुख करना पड़ रहा है। इसके अलावा, उनके पास मौजूद करीब 25 मवेशियों यानी गाय-बछड़ों को चराने के लिए भी किसी चरवाहे को नहीं आने दिया जा रहा है, जिससे पशुओं की देखभाल का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
पीड़ित परिवार ने बताया कि उनके घर में कुल 30 सदस्य हैं। पिछले वर्ष परिवार में तीन विवाह संपन्न होने के बाद रहने के लिए जगह कम पड़ रही थी, जिसके चलते वे अपनी निजी और पुश्तैनी भूमि पर मकान निर्माण करा रहे थे। उनका स्पष्ट कहना है कि निर्माण कार्य में किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया गया है, लेकिन विवाद खड़ा कर काम रुकवा दिया गया।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सामाजिक बहिष्कार करने और हुक्का-पानी बंद कराने में शामिल लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में गांव के सरपंच सहित 11 से अधिक नामजद लोगों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही पीड़ित परिवार ने गांव में समझाइश देकर उन्हें पुनः समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, सुरक्षा प्रदान करने और 1951 से दर्ज पुश्तैनी भूमि के राजस्व रिकार्ड की त्रुटियों में सुधार कराने का आग्रह किया है।