
नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व की टीम ने महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व से लगभग 400 किलोमीटर का सफर तय कर यहां पहुंचे एक बीमार गिद्ध का सफल रेस्क्यू किया है। माइक्रो ट्रांसमीटर और जीपीएस से लैस यह गिद्ध अत्यधिक कमजोरी और डी-हाइड्रेशन के कारण उड़ने में असमर्थ था।
मंगलवार को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के इन्द्रागांव बफर परिक्षेत्र अंतर्गत काण्डसर बीट में पेट्रोलिंग के दौरान श्रमिक राधेश्याम यादव ने गिद्ध को बीमार अवस्था में देखा। इसकी सूचना तत्काल परिक्षेत्र अधिकारी को दी गई, जिसके बाद मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
गिद्ध सिर झुकाकर बैठा हुआ था और उड़ नहीं पा रहा था। रेस्क्यू के दौरान बिलासपुर के वल्चर एक्सपर्ट अभिजीत शर्मा ने टेलीफोनिक माध्यम से टीम को आवश्यक मार्गदर्शन दिया। गिद्ध को मौके पर पानी और आहार उपलब्ध कराया गया। इसके बाद सुरक्षित तरीके से उसे जंगल से निकालकर गरियाबंद लाया गया।
वहां जंगल सफारी रायपुर के डॉक्टरों ने पहुंचकर गिद्ध को रेस्क्यू केज में शिफ्ट किया और उपचार के लिए जंगल सफारी रायपुर ले जाया गया।
अधिकारियों के अनुसार, उपचार के बाद गिद्ध को पूरी तरह स्वस्थ होने पर पुनः उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ा जाएगा। उल्लेखनीय है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र पहाड़ी वनों से घिरा है, जहां पूर्व में भी गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है।
इस सफल रेस्क्यू में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, इन्द्रागांव परिक्षेत्र तथा जंगल सफारी रायपुर की टीम का अहम योगदान रहा। उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि जंगल सफारी से डॉ. जडिया एवं ऋचा ने गरियाचंद पहुंचकर गिद्ध को रेस्क्यू केज में शिफ्ट किया।
जहां से उसे नया रायपुर स्थित जंगल सफारी लेकर जाया गया। उपचार के उपरांत गिद्ध को पुनः सुरक्षित रहवास में छोड़ा जाएगा।
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पेट्रोलिंग टीम के सदस्य राधेश्याम यादव ने बीमार गिद्ध को देखते ही तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। गिद्ध की पीठ पर माइक्रो ट्रांसमीटर और जीपीएस लगा हुआ था। गिद्ध महाराष्ट्र के ताडोबा टाइगर रिजर्व से मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व उसके बाद कान्हा किसली टाइगर रिजर्व से होते हुए 400 किलोमीटर का सफर तय कर एसटीआर पहुंचा था।