
नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर पड़ोसी राज्यों में आत्मसमर्पण करने वाले बस्तर संभाग केे पुनर्वासित जनों की गृह जिलों में वापसी शुरू हो गई है। बीते मंगलवार कोे बस्तर सीमा से सटे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से 50 पुनर्वासित जनों (पूर्व माओवादियाें) को वहां की पुलिस ने बस्तर के लिए रवाना किया।
कभी घने जंगलों में एके-47 रायफल लेकर घूमने वाले, एक-दूसरे के लिए जान देने-लेने को तैयार रहने वाले इन पुनर्वासित जनों की आंखें एक-दूसरे से बिछड़ते वक्त नम थीं। सोशल मीडिया पर इनकी विदाई का वीडियो वायरल हुआ तो भावुक विदाई की तस्वीरों ने सभी को ठिठकने पर मजबूर कर दिया।
विदित हो कि पिछले साल शीर्ष माओवादी नेता वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति के नेतृत्व में 15 अक्टूबर को 60 माओवादियों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस केे सामने सरेंडर किया था। सुरक्षा कारणों से इन सभी को गढ़चिरौली के पुलिस पुनर्वास केंद्र में रखा गया था। यहां उन्हें कौशल उन्नयन प्रोग्राम के अंतर्गत अलग-अलग ट्रेड में स्किल ट्रेनिंग दी गई।
इनमेें कुछ पूर्व माओवादियों के रिवर्स नसबंदी आपरेशन कराए गए ताकि वे परिवार बसा सकें, वहीं कुछ जोड़ों ने शादी कर सामान्य जिंदगी की नई शुरुआत की। अब पुनर्वास की इस प्रक्रिया केे तहत इनकी घर वापसी हुई है। बताया गया कि पहले चरण में 50 पूर्व माओवादियों को बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया गया। रवाना होने से पहले पुनर्वास केंद्र में विदाई समारोह रखा गया, जहां का दृश्य बेहद भावुक रहा। कभी जंगल में साथ-साथ बंदूक थामे चलने वाले साथी अब एक-दूसरे को गले लगाकर रोते नजर आए।
वर्ष 2024 से 31 मार्च 2026 तक (माओवादी हिंसा मुक्त बस्तर की घोषणा) लगभग तीन हजार माओवादियोें ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की। लगभग दो हजार को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस अवधि में कई बड़े माओवादियों के साथ अन्य कैडर केे माओवादी सुरक्षा बलों के द्वारा मार गिराए गए।
पड़ाेसी राज्य ओडिशा, तेेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड में सरेंडर करने वाले माओवादियोंं में कुछ बस्तर संभाग के भी हैं। जिन्हेंं संबंधित राज्यों के पुनर्वास केंद्रों में रखकर कौशल उन्नयन कार्यक्रम से जोड़ा गया है। यहां बस्तर संभाग के सभी सातों जिलों में भी इनकेे लिए पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।