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छत्तीसगढ़ के समीर की उड़ान नहीं रोक सकी आर्थिक तंगी, अब गांव का पहला MBBS डॉक्टर बनेगा बेटा

छत्तीसगढ़ के समीर मरकाम ने आर्थिक तंगी, मां की बीमारी और पिता के साथ खेतों में काम करने जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद ज्ञान गुड़ी के मार्गदर्शन से ...और पढ़ें

By Ramkrishna DongreEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 27 Jul 2026 03:31:52 PM (IST)Updated Date: Mon, 27 Jul 2026 03:31:52 PM (IST)
छत्तीसगढ़ के समीर की उड़ान नहीं रोक सकी आर्थिक तंगी, अब गांव का पहला MBBS डॉक्टर बनेगा बेटा
खेतों में काम और मां की बीमारी के बीच समीर ने क्रैक की NEET परीक्षा

HighLights

  1. खेतों में काम और मां की बीमारी के बीच समीर ने क्रैक की NEET परीक्षा
  2. कोंडागांव के चुरेगांव से पहले MBBS डॉक्टर बनने की ओर बढ़ाया कदम
  3. जगदलपुर के ज्ञान गुड़ी संस्थान से मिला नि:शुल्क और सटीक मार्गदर्शन

नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। आर्थिक अभाव, मां की बीमारी और खेतों में पिता के साथ मेहनत... इन कठिन परिस्थितियों के बीच भी कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड के ग्राम चुरेगांव के समीर मरकाम ने हार नहीं मानी। किसान परिवार से आने वाले समीर ने नीट-2026 परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने गांव का पहला एमबीबीएस डॉक्टर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन ही सफलता की असली कुंजी है।

पारिवारिक तंगी और बड़े भाई का संबल

समीर के पिता भुवनेश्वर मरकाम किसान हैं, जबकि उनकी मां लंबे समय से अस्वस्थ हैं और चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण महंगे निजी कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई संभव नहीं थी। ऐसे समय में बड़े भाई नरेंद्र कुमार मरकाम ने उन्हें जगदलपुर स्थित ज्ञान गुड़ी कोचिंग संस्थान की जानकारी दी और आर्थिक व मानसिक रूप से पूरा सहयोग किया। इसके बाद समीर ने ज्ञान गुड़ी में प्रवेश लेकर अपनी तैयारी शुरू की।


ज्ञान गुड़ी के शिक्षकों का मार्गदर्शन और सफलता

ज्ञान गुड़ी में संजीव विश्वास, श्रीनिवास राव, मनीष श्रीवास्तव और अलेक्जेंडर जैसे शिक्षकों के मार्गदर्शन ने समीर की मेहनत को सही दिशा दी। शिक्षकों ने न केवल पढ़ाई कराई, बल्कि लगातार प्रेरित कर आत्मविश्वास भी बढ़ाया। इसी का परिणाम रहा कि समीर ने नीट-2026 में सफलता प्राप्त कर अपने सपने को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

गांव की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था को देखकर आया डॉक्टर बनने का ख्याल

समीर बताते हैं कि डॉक्टर बनने की प्रेरणा उन्हें अपने गांव की स्वास्थ्य व्यवस्था को देखकर मिली। गांव में आज तक कोई एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। इलाज के लिए लोगों को दूर जाना पड़ता है और समय पर चिकित्सा नहीं मिलने से कई बार गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं। उन्होंने संकल्प लिया कि डॉक्टर बनने के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे, ताकि किसी मरीज को इलाज के लिए भटकना न पड़े।

पिता के साथ खेतों में काम करते हैं समीर

समीर कहते हैं कि पढ़ाई के साथ उन्हें पिता के साथ खेतों में भी काम करना पड़ता था। यही संघर्ष उनके लिए प्रेरणा बना। उनका मानना है कि गांव के कई विद्यार्थी आर्थिक तंगी के कारण 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। वे चाहते हैं कि उनकी सफलता ऐसे युवाओं को यह विश्वास दिलाए कि कठिन परिस्थितियां भी मेहनत, सही मार्गदर्शन और दृढ़ निश्चय के सामने बाधा नहीं बन सकतीं।

सफलता का श्रेय और ज्ञान गुड़ी का आभार

समीर ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, बड़े भाई और ज्ञान गुड़ी कोचिंग संस्थान को दिया है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए ज्ञान गुड़ी किसी वरदान से कम नहीं है। यह संस्थान निश्शुल्क और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन देकर उन युवाओं के सपनों को साकार करने का अवसर देता है, जो महंगे कोचिंग संस्थानों तक नहीं पहुंच सकते।

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