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तीन साल बाद पुलवामा से लौटी जांजगीर के चार परिवारों की खुशियां, एसपी की पहल पर मिली मुक्ति

रोजगार की तलाश में पुलवामा गए जांजगीर क्षेत्र के चार परिवारों को तीन साल बाद बंधक स्थिति से मुक्ति मिल गई है। एसपी विजय कुमार पाण्डेय की पहल और जम्मू-...और पढ़ें

By komal ShuklaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 06 Sep 2026 09:04:58 PM (IST)Updated Date: Sun, 06 Sep 2026 09:04:58 PM (IST)
तीन साल बाद पुलवामा से लौटी जांजगीर के चार परिवारों की खुशियां, एसपी की पहल पर मिली मुक्ति
बस से अपने गृहग्राम रवाना होते पीड़ित परिवार

HighLights

  1. जांजगीर जिले के मजदूरों का दर्द खत्म।
  2. बंधक बनाकर ईंट भट्ठे में कराया जा रहा था काम।
  3. एसपी की पहल पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कराया मुक्त।

नईदुनिया न्यूज, जांजगीर : रोजगार की तलाश में करीब तीन साल पहले जम्मू-कश्मीर गए चार परिवारों की जिंदगी उस वक्त मुश्किलों में घिर गई, जब पुलवामा के ईंट भट्ठे में मजदूरी कराने के बाद भी उन्हें मेहनताना नहीं दिया गया और कथित रूप से बंधक बनाकर काम कराया जाने लगा। किसी तरह एक मजदूर ने फोन से अपने परिचित को इसकी जानकारी दी।

मामला पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय तक पहुंचा तो उन्होंने तत्काल जम्मू-कश्मीर पुलिस से संपर्क कर चारों परिवारों को मुक्त कराने की पहल की। इसके बाद 16 सदस्यों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, की सकुशल घर वापसी कराई गई।

बम्हनीडीह थाना क्षेत्र के ग्राम कपिस्दा निवासी नरेश बंजारे, पवन बंजारे, मधु खडेल तथा सक्ती जिले के बाराद्वार निवासी संतोष टंडन करीब तीन वर्ष पूर्व रोजगार की तलाश में एक व्यक्ति के माध्यम से जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। वहां पुलवामा क्षेत्र के ईंट भट्ठे में मजदूरी कर रहे थे। पीड़ितों के अनुसार, भट्ठा मालिक द्वारा काम के बदले मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा था और उन्हें बंधन में रखकर जबरन काम कराया जा रहा था।


यह भी पढ़ें- जांजगीर के कोसा हत्याकांड की जांच फिर तेज, दो माह पहले हुई थी अमित भंडारी की हत्या

फोन पर मिली जानकारी, फिर शुरू हुई मदद की कवायद

किसी तरह नरेश बंजारे ने फोन के माध्यम से इसकी जानकारी अपने परिचित जवाहर टंडन को दी। जवाहर ने मामला भीम आर्मी के प्रदेश उपाध्यक्ष राम स्वरूप आजाद तक पहुंचाया। इसके बाद भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव कलेश्वर खूंटे ने अपनी टीम के साथ पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी।

एसपी पांडेय ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से साधा संपर्क

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने तत्काल संज्ञान लिया और जम्मू-कश्मीर पुलिस से संपर्क एवं समन्वय स्थापित कराया। आवश्यक कार्रवाई के बाद चारों परिवारों के 16 सदस्यों को सुरक्षित मुक्त कराया गया।

जांजगीर-चांपा पुलिस ने मानवीय पहल करते हुए सभी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों को अपने खर्चे से ट्रेन के माध्यम से जांजगीर वापस लाया। जांजगीर पहुंचने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डा. यूलैंडन यार्क ने सभी परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। इसके बाद पुलिस बस से उन्हें सम्मानपूर्वक उनके गृह ग्राम रवाना किया।

तीन साल बाद घर लौटे तो चेहरों पर लौटी मुस्कान

करीब तीन वर्षों तक अपनों से दूर और कठिन परिस्थितियों में रहने के बाद जब चारों परिवार अपने घर पहुंचे तो परिजनों की खुशी देखते ही बनी। पुलिस की इस पहल से परिवारों में राहत और खुशी का माहौल है।

जांजगीर-चांपा पुलिस की इस कार्रवाई ने यह संदेश भी दिया कि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में जरूरतमंदों के साथ खड़ी होकर उनकी सुरक्षित घर वापसी में भी भूमिका निभा सकती है।