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कोरबा का मामला,चार दिन तक तलाशता रहा अपनी बाइक, उम्मीद टूटी तो दे दी जान

कोरबा के बांकी मोंगरा में किस्तों पर खरीदी गई बाइक चोरी होने और चार दिन तक नहीं मिलने से मानसिक तनाव में आए दीपक कुमार कंवर नामक युवक ने फांसी लगाकर ज...और पढ़ें

By Pradeep BarmaiyaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 28 Jul 2026 10:52:41 AM (IST)Updated Date: Tue, 28 Jul 2026 10:52:41 AM (IST)
कोरबा का मामला,चार दिन तक तलाशता रहा अपनी बाइक, उम्मीद टूटी तो दे दी जान
घटनास्थल पर विवेचना करती पुलिस एवं उपस्थित स्वजन

HighLights

  1. नहीं मिली बाइक तो टूटा युवक का हौसला।
  2. मेहनत की कमाई से किस्तों पर खरीदी थी बाइक:।
  3. पुलिस की सुस्ती और बीमा दावे की अनिश्चितता पर सवाल।

नईदुनिया प्रतिनिधि,कोरबा: बांकी मोंगरा थाना क्षेत्र के बलगीखार निवासी दीपक कुमार कंवर 27 वर्ष ने अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। चार दिन पहले उसकी बाइक चोरी हो गई थी। पिता ईश्वर सिंह कंवर खेती-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने काफी मेहनत से किस्तों पर बेटे के लिए बाइक खरीदी थी, जो दीपक के लिए केवल एक वाहन नहीं बल्कि रोजमर्रा की जरूरत और परिवार की सबसे बड़ी पूंजी थी।

बाइक चोरी होने के बाद वह हर दिन उसकी तलाश में निकलता और मायूस होकर लौट आता। स्वजन का आरोप है कि पुलिस ने चोरी के मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। उनका कहना है कि चोरी के मामलों में जांच पूरी होने और वाहन का पता नहीं चलने पर ही आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है, जिसके बाद बीमा दावा भी आगे बढ़ पाता है। इसी अनिश्चितता और लगातार बढ़ती निराशा ने दीपक को भीतर तक तोड़ दिया।


रविवार रात खाना खाने के बाद वह अपने कमरे में सोने चला गया। सोमवार सुबह स्वजन ने उसे फंदे पर लटका देखा। सूचना पर बांकीमोंगरा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए मर्ग कायम किया। बांकीमोंगरा थाना प्रभारी चमन सिन्हा ने बताया कि बाइक चोरी की घटना दर्री थाना क्षेत्र की है और उसकी विवेचना वहीं की जा रही है। आत्महत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। उधर दर्री पुलिस बाइक चोरी के मामले में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाई।

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इसलिए अटक जाता है चोरी की बाइक का बीमा दावा

वाहन चोरी होने पर केवल एफआइआर दर्ज होना ही पर्याप्त नहीं होता। पुलिस जांच के बाद यदि वाहन बरामद नहीं होता तो न्यायालय के समक्ष अनट्रेस्ड (नान-ट्रेसेबल) अंतिम रिपोर्ट पेश की जाती है। इसके बाद ही अधिकांश मामलों में बीमा दावे की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

स्वजन का आरोप है कि यह प्रक्रिया लंबी खिंचने से पीड़ित परिवार आर्थिक और मानसिक दोनों तरह के दबाव में आ जाता है। हालांकि पुलिस का कहना है कि ऐसी रिपोर्ट जांच पूरी होने और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही तैयार की जाती है। इसमें समय लग सकता है।

राज्य में बढ़ी आत्महत्या की घटनाएं, एक साल में 594 मामलों का इजाफा

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया (एडीएसआइ)-2024 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ में 7,962 लोगों ने आत्महत्या की।

वर्ष 2023 में यह संख्या 7,368 थी। यानी एक वर्ष में 594 मामलों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आर्थिक दबाव, पारिवारिक तनाव, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और अचानक उत्पन्न होने वाली विपरीत परिस्थितियां लोगों को ऐसे कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर पारिवारिक सहयोग, सामाजिक संवाद और मनोवैज्ञानिक सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।