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छत्तीसगढ़ की जड़ी-बूटी चिकित्सा पहुंची राष्ट्रपति भवन, राष्ट्रपति ने साझा किए अपने पारिवारिक किस्से

छत्तीसगढ़ के पाली क्षेत्र के वैद्यराज जानकी प्रसाद पुलस्त ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर पारंपरिक जड़ी-बूटी चिकित्सा के संरक्षण और वैद्यों को आयुष मंत्रालय से जोड़ने की मांग की।

By Pradeep BarmaiyaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 25 Oct 2026 10:54:00 PM (IST)Updated Date: Sun, 25 Oct 2026 10:54:00 PM (IST)
छत्तीसगढ़ की जड़ी-बूटी चिकित्सा पहुंची राष्ट्रपति भवन, राष्ट्रपति ने साझा किए अपने पारिवारिक किस्से
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु के साथ वैद्यराज जानकी प्रसाद पुलस्त एवं अन्य

HighLights

  1. पाली के वैद्यराज जानकी प्रसाद पुलस्त ने राष्ट्रपति से मुलाकात की।
  2. छत्तीसगढ़ की पारंपरिक जड़ी-बूटी चिकित्सा के संरक्षण पर हुई चर्चा।
  3. राष्ट्रपति ने पारंपरिक वैद्यों से जुड़े अपने पारिवारिक अनुभव साझा किए।

नईदुनिया न्यूज, पाली : छत्तीसगढ़ की प्राचीन जड़ी-बूटी चिकित्सा परंपरा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने और ग्रामीण अंचलों में पीढ़ियों से पारंपरिक उपचार पद्धति का ज्ञान संजोए वैद्यराजों को संस्थागत पहचान दिलाने की पहल तेज हुई है। इसी कड़ी में पाली क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैद्यराज जानकी प्रसाद पुलस्त ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के संरक्षण, संवर्धन और वैद्यराजों को आयुष मंत्रालय से जोड़ने की आवश्यकता पर चर्चा की।

इस दौरान वैद्यराज जानकी प्रसाद पुलस्त ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में पारंपरिक चिकित्सा का ज्ञान रखने वाले वैद्यराजों की पहचान करने तथा उनके अनुभव और ज्ञान को संरक्षित करने का विषय उठाया। उन्होंने कहा कि गांवों में पीढ़ियों से प्रचलित जड़ी-बूटी एवं वनौषधि चिकित्सा पद्धतियों को उचित पहचान और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।


चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की पहल का भी उल्लेख किया गया। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध पारंपरिक ज्ञान को सहेजकर जनकल्याण के लिए उपयोगी बनाने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, वैद्यराज संघ के अध्यक्ष दर्शक नेताम, कोषाध्यक्ष आनकी प्रसाद कोराम, रामलाल, हरीशंकर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति ने साझा किए अपने पारिवारिक अनुभव

चर्चा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने पारिवारिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके पिता भी पीलिया और बवासीर जैसी बीमारियों के उपचार के लिए पारंपरिक वैद्यों के पास जाया करते थे। मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षण और संवर्धन की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री और वन मंत्री के प्रयासों का उल्लेख

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की अगुवाई में इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि वनौषधियों और जड़ी-बूटियों से संबंधित पारंपरिक ज्ञान भारतीय समाज की महत्वपूर्ण विरासत है। इसे संरक्षित करने के लिए अनुभवी वैद्यराजों के ज्ञान का दस्तावेजीकरण, उनकी पहचान और नई पीढ़ी तक इस विद्या को पहुंचाना आवश्यक है। इस पहल से पारंपरिक चिकित्सा विरासत को सहेजने और उसे व्यापक पहचान दिलाने की उम्मीद जताई गई।

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