
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात के प्रभाव से जिले में मौसम का मिजाज बिगड़ गया है। बुधवार सुबह से दिनभर हुई बारिश के कारण धान की कटाई का काम बाधित रहा। खेतों में पककर तैयार खड़ी फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
तेज बूंदों की मार से धान की बालियों से दाने झड़ने लगे हैं, वहीं खेतों में पानी भरने से फसल को नुकसान होने की आशंका है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दो से तीन दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्कता बरतने और खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करने की सलाह दी है।
बुधवार को सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और दिनभर रुक-रुककर बारिश होती रही। जिले में औसतन 72.21 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जिले में करीब 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई है। कृषि विभाग के अनुसार लगभग 43 प्रतिशत रकबे में फसल पककर तैयार हो चुकी है। ऐसे समय में लगातार बारिश होने से कटाई और फसल को सुरक्षित रखने की चुनौती बढ़ गई है।
खेतों में खड़ी फसल के साथ कटाई के बाद खुले में रखी उपज भी प्रभावित हो सकती है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि धान, दलहन और तिलहन की फसल पकने की अवस्था में है तो अगले दो से चार दिनों तक कटाई से बचें। जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं।
भारी बारिश की आशंका को देखते हुए खेतों के मुहाने खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करें, ताकि जलभराव से फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने के लिए भी कहा गया है।
फसलों में कीट या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद आवश्यकतानुसार कीटनाशक या कवकनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। उतेरा फसल के रूप में तिवरा या अलसी लेने वाले किसान फिलहाल बुवाई टालें। रबी फसलों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है।
बारिश और तेज हवा की संभावना को देखते हुए सब्जी उत्पादक किसानों को भी सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। फूलगोभी, चुकंदर, खीरा और करेला जैसी रबी सब्जियों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है। बेल वाली सब्जियों, जैसे करेला, लौकी और अन्य कद्दूवर्गीय फसलों को तेज हवा से बचाने के लिए सहारा देने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
केले के जिन पौधों में फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें बांस के सहारे से सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। ओलावृष्टि की आशंका वाले क्षेत्रों में बागवानी और सब्जियों की फसलों को बचाने के लिए उपलब्धता के अनुसार ओलावृष्टिरोधी जाली का उपयोग करने की सलाह भी दी गई है। किसानों को मौसम साफ होने के बाद ही कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए दवाओं का छिड़काव करने को कहा गया है।
मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए पशुपालकों को भी सतर्क रहने कहा गया है। पशुओं को सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखने के साथ उनके लिए पर्याप्त चारे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
वज्रपात की आशंका के दौरान पशुओं को चराते समय पेड़ों के नीचे आश्रय लेने से बचने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग ने किसानों से मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने और फसल व पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करने की अपील की है।
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राज्य शासन ने आगाम 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की घोषणा की है। एक ओर किसानों को मौसमी मार से फसल के नुकसान की आशंका सता रही है। वहीं पंजीयन और रकबा में सुधार नहीं, धान बिक्री से वंचित रहने की चिंता बनी हुई। उल्लेनीय है कि पटवारियों के हड़ताल पर चले जाने राजस्व संबंधित काम काज ठप हो गया है। मौसमी मार की वजह से धान उपार्जन केंद्रों में भी खरीदी की तैयारियां ठप नजर आर रही है।
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मौसमी बदलाव के बीच हो रही वर्षा का व्यापक असर देखा जा रहा है, किसानों का फसल सुरक्षा के लिए पहले से ही सतर्क किया जा चुका है। फसल की कटाई ना करने के अलावा कट चुके फसल को सूखे स्थान पर ले जाने के लिए कहा जा रहा है। खेतों में पानी का अनावश्यक भराव ना होने देने की भी सलाइ दी जा रही है। मौसमी उतार चढ़ाव के बीच कृषि संबंधित गतिविधियो पर नजर रखी जा रही है। - डीपीएस कंवर, सहायक संचालक, कृषि