
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: नीलकंठ इंफ्रा माइनिंग लिमिटेड कुसमुंडा कंपनी ने अपने कैंप परिसर के मुख्य द्वार पर नो वेकेंसी का बोर्ड लगा दिया है। इसके साथ ही अनाधिकृत लोगों के प्रवेश पर भी बंद कर दिया है।
साऊथ ईस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की कुसमुंडा खदान में नीलकांठ कंपनी को कोयला उत्खनन, मिट्टी निकासी एवं परिवहन का काम मिला हुआ है। कंपनी ने कुछ बाहरी कर्मियों के साथ ही स्थानीय लोगों को काम पर रखा है।
पिछले दिनों छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के कार्यकर्ताओं ने कैंप में सो रहे मजदूरों से न केवल मारपीट की थी, बल्कि उन्हें स्थल से भगा दिया था। इससे कंपनी का कामकाज प्रभावित हुआ। हालांकि पुलिस हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ और पुलिस ने 30 लोगों के विरुद्ध अपराध भी पंजीबद्ध किया है।
इस दौरान कंपनी पर क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने शत प्रतिशत स्थानीय लोगों को काम पर रखने की मांग की थी। जबकि समझौता के मुताबिक 70 प्रतिशत स्थानीय तथा 30 प्रतिशत बाहरी लोगों काम रखना था। कंपनी का कहना था कि 850 से भी ज्यादा स्थानीय लोगों को काम पर रखा गया है।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों के उम्मीद थी कि कंपनी द्वारा सभी लोगों को काम पर रखा जाएगा, पर कंपनी द्वारा नो वेकेंसी का बोर्ड लगाने से ऐसे लोगों में मायूसी छा गई है। कंपनी का कहना है कि फिलहाल कोई पद रिक्त नहीं है, इसलिए सभी प्रकार की भर्तियां पूर्ण रूप से बंद कर दी गई है। बताया जा रहा है कि एसईसीएल कुसमुंडा कमेटी द्वारा रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसके बाद अब कंपनी में किसी भी प्रकार का पद रिक्त नहीं है।
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क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कई नेता नुमा लोगों ने नौकरी लगाने का काम शुरू कर दिया था। एसईसीएल की खदान में नियोजित ठेका कंपनी नीलकंठ समेत अन्य कंपनियों में इन लोगों द्वारा नौकरी लगाने का प्रलोभन दिया जाता था। कई लोगों ने उक्त राशि भी ऐसे नेताओं को दी, इनमें कुछ को नौकरी मिली तो कई लोग वंचित रह गए। ग्रामीण बेरोजगार युवक इतनी बड़ी राशि किसी तरह व्यवस्था कर इन नेताओं को दिए थे, पर अब ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।