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नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: मानसून की लगातार वर्षा ने कोरबा में कोयला खनन और बिजली उत्पादन की तस्वीर एक साथ बदली है। खदानों में वर्षा का पानी भरने और मिट्टी-चट्टान हटाने का काम प्रभावित होने से एसईसीएल का उत्पादन लक्ष्य से पीछे रह गया। वहीं कोरिया और सरगुजा के ऊपरी क्षेत्रों में हुई वर्षा से बांगो बांध में पानी की आवक बढ़ गई। इससे जल विद्युत संयंत्रों का संचालन बढ़ा और बिजली उत्पादन में तेजी आई।
कोयला मंत्रालय के अगस्त के उत्पादन आंकड़ों के अनुसार एसईसीएल ने 112.60 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 99 लाख टन कोयला निकाला। कंपनी लक्ष्य का 87.94 प्रतिशत ही हासिल कर सकी। पिछले वर्ष अगस्त की तुलना में उत्पादन 11.20 लाख टन यानी 10.13 प्रतिशत कम रहा। लक्ष्य और वास्तविक उत्पादन के बीच 13.60 लाख टन का अंतर रहा। वर्षा के कारण खुली खदानों में जलभराव के साथ मिट्टी और चट्टान की ऊपरी परत हटाने का काम प्रभावित हुआ।
कई स्थानों पर खदानों से पानी निकालने और सुरक्षित परिचालन बनाए रखने में अतिरिक्त समय लगा। इसका असर कोयला निकालने के साथ परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ा। हालांकि कोल इंडिया की सभी सहायक कंपनियों पर वर्षा का असर समान नहीं रहा। पश्चिमी और पूर्वी कोलफील्ड्स ने अगस्त में अपने लक्ष्य से अधिक उत्पादन किया। एसईसीएल के अधिकारियों का कहना है कि मौसम के साथ खदानों की स्थानीय परिस्थितियां और परिचालन व्यवस्था भी उत्पादन को प्रभावित करती हैं।
दूसरी ओर बांगो बांध के लिए लगातार वर्षा लाभकारी रही। बांध के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र कोरिया और सरगुजा में अच्छी वर्षा होने से पानी की आवक बढ़ी है। बांगो परियोजना के कार्यपालन अभियंता संतोष भारतीय ने बताया बांध से 9000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसके साथ तीनों जलविद्युत संयंत्र 24 घंटे चलाए जा रहे हैं। इससे प्रतिदिन करीब 28.50 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसकी अनुमानित कीमत 1.20 करोड़ रुपये है।
पानी की उपलब्धता बढ़ने पर जलविद्युत संयंत्रों का संचालन जारी रखने में मदद मिल रही है। इस तरह एक ही वर्षा का असर जिले के दो प्रमुख क्षेत्रों में अलग-अलग दिखाई दे रहा है। खदानों में इससे कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ है, जबकि बांगो में यही पानी बिजली उत्पादन बढ़ाने का आधार बना है।
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अगस्त में कोल इंडिया 50.10 लाख टन लक्ष्य से पीछे
अगस्त में एसईसीएल के साथ कोल इंडिया का कुल उत्पादन भी निर्धारित लक्ष्य से कम रहा। कोल इंडिया ने 525.30 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 475.20 लाख टन कोयला उत्पादन किया। यह लक्ष्य का 90.47 प्रतिशत रहा। यानी कंपनी 50.10 लाख टन लक्ष्य से पीछे रही। सात सहायक कंपनियों में एसईसीएल का उत्पादन लक्ष्य हासिल करने का प्रतिशत 87.94 रहा। वहीं नार्दन कोलफील्ड्स ने 76.92 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया। इसके विपरीत वेस्टर्न कोलफील्ड्स और ईस्टर्न कोलफील्ड्स ने क्रमश: 118.40 और 115.89 प्रतिशत उत्पादन कर लक्ष्य पार किया।
वर्षा के बीच इन कंपनियों ने किया लक्ष्य पार
अगस्त में कोल इंडिया की सहायक कंपनियों के उत्पादन में काफी अंतर रहा। वेस्टर्न कोलफील्ड्स ने 28.60 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 33.80 लाख टन उत्पादन किया, यानी लक्ष्य से 5.20 लाख टन अधिक। ईस्टर्न कोलफील्ड्स ने 32 लाख टन के लक्ष्य के विरुद्ध 37.10 लाख टन उत्पादन कर 5.10 लाख टन अधिक कोयला निकाला।
सेंट्रल कोलफील्ड्स ने 60.70 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 55.70 लाख टन उत्पादन किया। भारत कोकिंग कोल 24.80 लाख टन के लक्ष्य के विरुद्ध 22.10 लाख टन और महानदी कोलफील्ड्स 155.70 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 142.10 लाख टन पर रही। नार्दन कोलफील्ड्स का उत्पादन 110.90 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 85.30 लाख टन रहा।
मानसून के बाद भरपाई की चुनौती
एसईसीएल के उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट ऐसे समय में आई है, जब कंपनी कोल इंडिया की प्रमुख उत्पादन इकाइयों में शामिल है। बारिश का असर कम होने के बाद कंपनी के सामने अगस्त में हुई कमी की भरपाई की चुनौती होगी।
इसके लिए खदानों से पानी की निकासी, ऊपरी मिट्टी और चट्टान हटाने के काम में तेजी तथा उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर देना होगा। आने वाले महीनों के उत्पादन आंकड़ों से स्पष्ट होगा कि एसईसीएल मानसून के कारण हुई कमी को कितनी तेजी से पूरा कर पाती है।