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200 आत्मसमर्पित माओवादियों को परिवार की चाह, खोली जाएगी नसबंदी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम करेगी प्रक्रिया

संगठन में रहने के दौरान माओवादी नेताओं द्वारा जिन युवाओं की नसबंदी कराई गई थी, आत्मसमर्पण के बाद अब वे अपना परिवार बसाना चाहते हैं।

By Satish PandeyEdited By: manoj dubey
Publish Date: Thu, 20 Aug 2026 12:36:35 PM (IST)Updated Date: Thu, 20 Aug 2026 12:37:26 PM (IST)
200 आत्मसमर्पित माओवादियों को परिवार की चाह, खोली जाएगी नसबंदी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम करेगी प्रक्रिया

HighLights

  1. संगठन में भर्ती के बाद कराई जाती थी नसबंदी
  2. विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम फिर पहुंचेगी बस्तर
  3. चार आत्मसमर्पित माओवादी बने पिता

राज्य ब्यूरो,नईदुनिया,रायपुर। संगठन में रहने के दौरान माओवादी नेताओं द्वारा जिन युवाओं की नसबंदी कराई गई थी, आत्मसमर्पण के बाद अब वे अपना परिवार बसाना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि 200 से अधिक आत्मसमर्पित माओवादी नसबंदी खुलवाने के लिए सहमत हैं।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बस्तर पहुंचकर विशेष चिकित्सा शिविर में यह प्रक्रिया करेगी। उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने पिछले दिनों पुलिस के आला अधिकारियों के साथ पुनर्वास की समीक्षा के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा कर अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


संगठन में भर्ती के बाद कराई जाती थी नसबंदी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, माओवादी संगठनों में भर्ती होने वाले कई युवाओं की नसबंदी करा दी जाती थी। आत्मसमर्पण के बाद मुख्यधारा में लौटे कई युवक अब विवाह कर परिवार बसाना चाहते हैं। ऐसे में उन्होंने प्रशासन व पुलिस अधिकारियों से नसबंदी खुलवाने में सहयोग मांगा है। सरकार इसे आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास का हिस्सा मानकर आगे बढ़ रही है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम फिर पहुंचेगी बस्तर

अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में नसबंदी खुलवाने आत्मसमर्पित 200 से अधिक माओवादी इच्छुक है। जल्द ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बस्तर पहुंच सकती है। इसके बाद शिविर लगाकर इच्छुक लोगों की चिकित्सकीय जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

चार आत्मसमर्पित माओवादी बने पिता

राजनांदगांव में नसबंदी खुलवाने के बाद चार आत्मसमर्पित माओवादियों ने शादी की और अब वे पिता भी बन चुके हैं। इससे पुनर्वास की इस पहल को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी उत्साह है। हालांकि, शिविर में आत्मसमर्पित महिला माओवादियो को शामिल किया जाएगा या नहीं, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक नसबंदी खुलवाने के जो मामले सामने आए हैं, वे सभी पुरुषों के हैं।

पहले भी लगाए जा चुके हैं शिविर

बस्तर के एसएसपी शलभ सिन्हा का कहना है कि नसबंदी खुलवाने के मामले पहले भी सामने आए हैं। सुकमा सहित बस्तर के अन्य क्षेत्रों में शिविर लगाकर विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाया जा चुका है। यूरोलाजिस्ट सोसायटी आफ इंडिया के विशेषज्ञों ने बस्तर पहुंचकर करीब 50 आत्मसमर्पित माओवादियों की नसबंदी खोलने की प्रक्रिया की थी।

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