जशपुर का लाल अनिमेष कुजूर राष्ट्रमंडल खेलों में चमका, 200 मीटर सेमीफाइनल में बनाई जगह
छत्तीसगढ़ के धावक अनिमेष कुजूर ने राष्ट्रमंडल खेलों की 200 मीटर दौड़ 20.46 सेकंड में पूरी कर सेमीफाइनल में जगह बनाई। अब उनसे पदक की उम्मीद बढ़ गई है।
Publish Date: Wed, 29 Jul 2026 09:18:33 PM (IST)Updated Date: Wed, 29 Jul 2026 09:18:33 PM (IST)
अनिमेष कुजूर राष्ट्रमंडल खेलों में चमके। (फाइल फोटो)HighLights
- अनिमेष कुजूर 200 मीटर सेमीफाइनल में शानदार प्रदर्शन से पहुंचे।
- 20.46 सेकंड समय, सभी हीट्स में सातवां सबसे तेज।
- जशपुर के छोटे गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा सफर।
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। गोस्वामी साहू। छत्तीसगढ़ के उभरते सितारे अनिमेष कुजूर ने ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों (कामनवेल्थ गेम्स) में अपने धमाकेदार डेब्यू को बेहद यादगार बना दिया है। पुरुषों की 200 मीटर स्पर्धा में अनिमेष ने महज 20.46 सेकंड में रेस पूरी कर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। सभी हीट्स के एथलीटों में उनका समय सातवां सबसे तेज रहा। प्रतियोगिता के नियमानुसार शीर्ष 16 धावकों ने सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया है। अब पूरा देश सेमीफाइनल और फाइनल में उनसे पदक की उम्मीद लगाए बैठा है।
गौरतलब है कि अनिमेष रिलायंस फाउंडेशन द्वारा समर्थित खिलाड़ी हैं। कामनवेल्थ की तैयारियों के दौरान ही उन्होंने जर्मनी में आयोजित 'वर्ल्ड एथलेटिक्स कान्टिनेंटल टूर चैलेंजर' की 100 मीटर स्पर्धा को केवल 10.14 सेकंड में पूरा किया था। इसके साथ ही वह विदेशी सरजमीं पर सबसे तेज 100 मीटर दौड़ने वाले भारतीय एथलीट बने थे।
जशपुर के छोटे से गांव से निकलकर कामनवेल्थ तक
- अनिमेष कुजूर जशपुर जिले के दुलदुला ब्लाक की खमतरा पंचायत अंतर्गत स्थित गुइटांगर गांव के निवासी हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा कक्षा छठवीं से बारहवीं तक सैनिक स्कूल अंबिकापुर से पूरी की। उनके पिता अमृत कुजूर अंबिकापुर में और माता रीना कुजूर सूरजपुर में डीएसपी के पद पर कार्यरत हैं।
- अनिमेष के पिता अमृत कुजूर ने बताया कि बेटे की खेलों में रुचि बचपन से थी, लेकिन परिवार को प्रारंभिक दौर में उसकी असाधारण क्षमता का अंदाजा नहीं था। विभिन्न प्रतियोगिताओं में लगातार पदक जीतने के बाद परिवार ने उनके खेल करियर को पूरा समर्थन देना शुरू किया। अनिमेष ने बताया कि वर्तमान में वह 200 मीटर और 400 मीटर दौड़ के राष्ट्रीय रिकार्डधारी हैं।
फुटबाल से शुरू हुआ एथलेटिक्स का सफर
- अनिमेष ने बताया कि शुरुआती दिनों में उनकी रुचि फुटबाल में थी। कोविड-19 के बाद उन्होंने दौड़ प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं की पांच श्रेणियों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्होंने राज्य स्तर पर भी 200 और 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल हासिल किए। बाद में बिना किसी विशेष कोचिंग के गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में चौथा स्थान प्राप्त कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
- अनिमेष के करियर में वर्ष 2022 महत्वपूर्ण साबित हुआ, जब उन्होंने बिलासपुर में आयोजित अंडर-23 नेशनल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पहला स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद जनवरी 2023 में उन्होंने रिलायंस फाउंडेशन एथलेटिक्स से जुड़कर अपने प्रदर्शन को नई दिशा दी। वर्ष 2025 में उन्हें विदेश में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिला, जहां उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय रिकार्ड अपने नाम किए।
पीएम मोदी ने मन की बात में की थी रिकार्ड प्रदर्शन की सराहना
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात की 134वीं कड़ी में छत्तीसगढ़ के उभरते अंतरराष्ट्रीय धावक अनिमेष कुजूर का विशेष उल्लेख किया था। प्रधानमंत्री ने अनिमेष से बातचीत करते हुए उनकी उपलब्धियों की सराहना की और आगामी प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं भी दी थीं।
- अनिमेष ने सैनिक स्कूल अंबिकापुर में वर्ष 2014 से 2021 तक कक्षा छठवीं से 12वीं तक पढ़ाई की। स्कूल के तत्कालीन हाउस मास्टर सौरभ कुमार जैन का एक वाक्य उनके लिए टर्निंग पॉइंट बन गया। एक दिन शाम को मेस से लौटते समय धीरे चल रहे अनिमेष से कारण पूछा गया तो उसने जबाब नहीं दिया। तब हाउस मास्टर सौरभ जैन ने अनिमेष से कहा था कि तुम केवल चल नहीं, दौड़ भी सकते हो। बस इसी से अनिमेष ने दौड़ को अपना लक्ष्य बना लिया।
रिलायंस फाउंडेशन बना रही डाक्यूमेंट्री
राष्ट्रमंडल खेल से पहले वे ओडिसा के भुवनेश्वर स्थित रिलायंस फाउंडेशन में प्रशिक्षण ले रहे थे। रिलायंस फाउंडेशन की टीम इसी महीने सैनिक स्कूल अंबिकापुर पहुंची थी और अनिमेष के प्रेरणादायक सफर पर डॉक्यूमेंट्री के लिए शूटिंग भी की। सैनिक स्कूल के एक कैडेट द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल करना सरगुजा संभाग के युवाओं के लिए प्रेरणा है। उसे युवाओं के समक्ष एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।