
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर: प्रदेश में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना 'श्री राम वन गमन पर्यटन परिपथ' विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों की भेंट चढ़ गई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा 137.45 करोड़ रुपये की इस योजना में अनियमितताओं की जांच और सोशल आडिट की घोषणा के बाद से इसका निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। आलम यह है कि दूसरे चरण के लिए न तो बजट का प्रविधान किया गया है और न ही पर्यटन विभाग से कोई नया प्रस्ताव मांगा गया है।
नौ फरवरी 2024 को पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इसके निर्माण कार्यों और स्थापित मूर्तियों की गुणवत्ता को लेकर विधायक अजय चंद्राकर के उठाए गए प्रश्न पर इसकी सोशल आडिट कराए जाने की घोषणा की थी।
इसके बाद 10 जनवरी 2025 को भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय सोशल आडिट कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी में कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह सहित विशेषज्ञ प्रोफेसर एल.एस. निगम और अन्य सदस्य शामिल हैं।
भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने चंपारण और चंदखुरी जैसे स्थानों को इस पथ में शामिल करने पर सैद्धांतिक सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत बताया है। पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन के दौरान कुल 75 स्थानों को चिह्नित कर विकास की रूपरेखा तैयार की गई थी, जिसमें से पहले चरण में नौ प्रमुख स्थलों पर कार्य शुरू हुआ था। लेकिन जांच की घोषणा के बाद से इस पूरे प्रोजेक्ट को 'ठंडे बस्ते' में डाल दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, प्रोजेक्ट में अब तक निर्माण एजेंसियों को लगभग 82 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि कई कार्य अधूरे होने के बावजूद एजेंसियों को 77 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी गई।
सीतामढ़ी हरचौका (भरतपुर), रामगढ़ (रामगिरि पर्वत), शिवरीनारायण, तुरतुरिया (वाल्मिकी आश्रम), माता कौशल्या मंदिर (चंदखुरी), चंपारण (मांडव्य आश्रम), लोमस ऋषि आश्रम (राजिम), श्रृंगी ऋषि एवं सप्तर्षि आश्रम (सिहावा), रामाराम (सुकमा)।
श्री राम वन गमन पर्यटन परिपथ योजना की सोशल आडिट की जांच के लिए कमेटी गठित है। प्रक्रिया चल रही है। इस पर कोई रोक नहीं है।
- राजेश अग्रवाल, मंत्री, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग