छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में पदोन्नति नहीं होने से संयुक्त संचालक का पद खाली, प्राचार्यों को प्रभार
छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में पदोन्नति के अभाव में उच्च अधिकारियों की कमी है। 15 अफसरों के दायित्व बदले गए, प्राचार्यों को संयुक्त संचालक समेत डीईओ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 09 Sep 2026 08:46:02 AM (IST)Updated Date: Wed, 09 Sep 2026 08:52:48 AM (IST)
छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग में पदोन्नति नहीं हो रही है। (फाइल फोटो)HighLights
- पदोन्नति नहीं होने से उच्च अधिकारियों के पद लगातार खाली।
- उप संचालक के 59 पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया लंबित।
- प्राचार्यों को संयुक्त संचालक और डीईओ का प्रभार मिला।
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर: स्कूल शिक्षा विभाग में पदोन्नति नहीं होने के चलते उच्च अधिकारियों की बेहद कमी हो गई है। इसका फायदा उठाकर विभाग के उच्च पदों पर कनिष्ठों को बैठाने और प्रभारवाद का खेल खेलने की नीति अनवरत जारी है।
मंगलवार को स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूल शिक्षा के 15 अफसरों के दायित्वों में बदलाव किया। हद तो ये हो गई की प्राचार्य स्तर के कर्मियों को सीधे संयुक्त संचालक का प्रभार दे दिया गया। अभी तक प्राचार्यों को जिला शिक्षा अधिकारी यानी डीईओ का प्रभार दिया जाता रहा है अब उन्हें संयुक्त संचालक का भी प्रभार देने से सवाल खड़े हो गए हैं। इसकी मुख्य वजह उच्च अधिकारियों के रिक्त पदों पर समय पर पदोन्नति नहीं होना है।
उप संचालक के रिक्त पदों पर पदोन्नति नहीं
- लोक शिक्षण संचालनालय के उच्च अधिकारी उप संचालक के 59 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया नहीं कर पा रहे हैं। वर्तमान में केवल उप संचालक स्तर के तीन अधिकारी हैं। इनमें एचआर सोम, दिनेश कौशिक और राकेश पांडेय शामिल हैं।
- विभाग के नियमानुसार इन अफसरों को ही एक पद ऊपर प्रतिनियुक्ति पर बैठाया जा सकता है। वहीं हजारों की संख्या में प्राचार्य ऐसे हैं जो कि उप संचालक बनाए जा सकते हैं पर विभाग जानबूझकर इस पर प्रक्रिया नहीं कर रहा है। ये खेल पिछली कांग्रेस सरकार में भी जारी रहा है जब व्याख्याता को भी डीईओ बना दिया गया था।
अफसरों के बीच बड़ी खाई
- पदोन्नति नहीं होने के कारण अफसरों के बीच बड़ी खाई बन गई है। आलम ये है कि संयुक्त संचालक के 14 पद हैं और इनके लिए पर्याप्त उप संचालक भी नहीं हैं कि उन्हें पदोन्नत किया जा सके। संयुक्त संचालक स्तर के भी केवल तीन अधिकारी है।
- इनमें सबसे वरिष्ठ जेपी रथ, के कुमार और संजीव श्रीवास्तव हैं। दिलचस्प बात ये है कि अतिरिक्त संचालक के तीन पदों पर एक भी अधिकारी नही हैं। इसी तरह लोक शिक्षण संचालनालय में संचालक का अकादमिक पद भी रिक्त है। शिक्षाविदों का कहना है कि ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में डिप्टी कलेक्टरों को भी कलेक्टर बनाया जा सकेगा।
बिलासपुर और सरगुजा में प्राचार्य बने संयुक्त संचालक
जारी आदेश के अनुसार, बिलासपुर संभाग के प्रभारी उप संचालक राजेश सिंह को सरगुजा संभाग का प्रभारी उप संचालक बनाते हुए संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा) सरगुजा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वहीं सरगुजा में पदस्थ प्रभारी उप संचालक अश्वनी भारद्वाज को बिलासपुर संभाग में स्थानांतरित कर संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा) बिलासपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
इन जिलों में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी
- जांजगीर-चांपा: ए.के. सिन्हा को सूरजपुर का प्रभारी डीईओ, प्राचार्य मनोहर प्रताप सिंह को जांजगीर-चांपा का नया प्रभारी डीईओ, रामेश्वर जायसवाल को जिला मिशन समन्वयक (समग्र शिक्षा), जांजगीर-चांपा, संदीप कुमार पांडे को बिलासपुर के प्रभारी डीईओ, सहायक संचालक जगजीत धीर को दुर्ग का प्रभारी डीईओ , डॉ. मोहन लाल पटेल को मुंगेली डीईओ, प्राचार्य उपेंद्र कुमार देवांगन को खैरागढ़-छुईखदान-गंडई का प्रभारी डीईओ, प्राचार्य शिव कुमार गेंदले को बलौदाबाजार-भाटापारा का नया प्रभारी डीईओ पदस्थ किया गया है।
इसी तरह पुरुषोत्तम लाल साहू को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी प्रभारी डीईओ बनाया गया। योगदास साहू को प्रतिनियुक्ति पर डाइट खैरागढ़ का प्राचार्य नियुक्त किया गया है। तिल्दा बीईओ आरपीदास को हटाकर उप संंचालक संयुक्त संचालक कार्यालय में पदस्थ किया गया है। मंत्री ने अधिकारियों को दिया निर्देश
उप संचालक पद पद पदोन्नति के लिए मैंने अधिकारियों को निर्देश दिया है। प्रक्रिया चल रही है। गजेंद्र यादव, मंत्री, स्कूल शिक्षा।
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