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स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव! पहली से 12वीं तक छत्तीसगढ़ी का अलग विषय, SCERT ने शुरू की प्रक्रिया

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने आगामी शैक्षणिक सत्र से इसे सभी कक्षाओं में लागू करने की दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी है। हा...और पढ़ें

By Vakesh SahuEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 07 Oct 2026 11:17:59 PM (IST)Updated Date: Wed, 07 Oct 2026 11:17:59 PM (IST)
स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव! पहली से 12वीं तक छत्तीसगढ़ी का अलग विषय, SCERT ने शुरू की प्रक्रिया
पहली से 12वीं तक छत्तीसगढ़ी का अलग विषय

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा और स्थानीय बोली को अब प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी तक स्वतंत्र विषय के रूप में पढ़ाने की तैयारी है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने आगामी शैक्षणिक सत्र से इसे सभी कक्षाओं में लागू करने की दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, अंतिम निर्णय शासन स्तर से लिया जाएगा।

एससीईआरटी में हुई उच्चस्तरीय चर्चा

छत्तीसगढ़ी भाषा को विद्यालयों में स्वतंत्र विषय के रूप में शामिल करने के संबंध में शंकर नगर स्थित एससीईआरटी में बैठक हुई। इसमें पाठ्यक्रम तैयार करने, कक्षावार अध्यापन और विद्यालयों में लागू करने सहित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।


बैठक में अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों ने प्रक्रिया को जल्द पूरा करने पर जोर दिया। बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक जेपी रथ, उप सचिव बी. रघु, पद्मश्री महेंद्र मिश्रा, सुशील राठौर, डेगेश्वर वर्मा, राजीव गुप्ता, यशवंत चतुर्वेदी सहित अन्य अधिकारी व प्राचार्य उपस्थित रहे।

18 स्थानीय बोलियों में पढ़ाई और नया खाका

नई शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत प्रदेश में कक्षा पहली से पांचवीं तक बच्चों को स्थानीय भाषा से जोड़ने की पहल पहले से चल रही है। छत्तीसगढ़ी के साथ सरगुजिहा, हल्बी, सादरी, गोंडी और कुड़ुख समेत 18 स्थानीय बोली-भाषाओं में पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।

वर्तमान व्यवस्था में पहली से तीसरी कक्षा तक हिंदी के साथ छत्तीसगढ़ी और स्थानीय भाषा को पाठ के अनुसार त्रिभाषीय व्यवस्था में शामिल किया गया है। चौथी और पांचवीं में हिंदी के साथ क्षेत्र के अनुसार स्थानीय बोली-भाषा को जोड़ा गया है। अब छत्तीसगढ़ी को सभी कक्षाओं में स्वतंत्र विषय के रूप में पढ़ाने की तैयारी है।

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