• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर

छत्तीसगढ़ में कारोबार करना हुआ बेहद आसान, विधानसभा में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम 2026' पारित

विधानसभा में गुरुवार को छत्तीसगढ़ ईज आफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 पारित किया गया है। इस अधिनियम के अंतर्गत उद्योगों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधिय...और पढ़ें

By Sandeep TiwariEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Fri, 17 Jul 2026 12:54:48 PM (IST)Updated Date: Fri, 17 Jul 2026 12:54:48 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में कारोबार करना हुआ बेहद आसान, विधानसभा में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम 2026' पारित
विधानसभा में गुरुवार को "छत्तीसगढ़ ईज आफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026" पारित (AI से जनरेट इमेज)

HighLights

  1. विधानसभा से पारित हुआ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026
  2. जोखिम आधारित बिजनेस परमिशन व्यवस्था लागू
  3. कारोबारियों को हर साल लाइसेंस नवीनीकरण से मिलेगी राहत

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छोटे कारोबारों को अब आसानी से मंजूरी मिलेगी। विधानसभा में गुरुवार को "छत्तीसगढ़ ईज आफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026" पारित किया गया है, जिसके तहत जोखिम आधारित बिजनेस परमिशन व्यवस्था लागू की जाएगी। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य उद्योगों और कारोबार की स्थापना तथा संचालन की प्रक्रियाओं को सरल बनाना है, जिससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एक पारदर्शी और उद्यम-अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सके।

इस अधिनियम के अंतर्गत उद्योगों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों के आधार पर विभिन्न जोखिम श्रेणियों में किया जाएगा। कम जोखिम वाले छोटे कारोबारों को सरल और त्वरित मंजूरी मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं के लिए तकनीकी परीक्षण और समयबद्ध स्वीकृति की प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। इससे छोटे कारोबारियों को बड़े उद्योगों जैसी जटिल प्रक्रियाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।


कम जोखिम के उद्यमों में सेल्फ सर्टिफिकेशन

नई व्यवस्था में कम जोखिम वाले उद्यमों के लिए बार-बार विभागीय निरीक्षणों के स्थान पर सेल्फ सर्टिफिकेशन या लाइसेंसधारी अभियंता, आर्किटेक्ट या अन्य अधिकृत पेशेवरों द्वारा प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे अनुमतियों की प्रक्रिया तेज और अधिक जवाबदेह बनेगी। अधिनियम के तहत हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर दी जाएगी, जिससे उद्यमियों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी।

यह भी पढ़ें- भारत टेक्स-2026 में दिखेगी MP की ताकत, वैश्विक निवेशकों से मिलकर मोहन यादव खोलेंगे हजारों करोड़ के निवेश के नए द्वार

एमएसएमई इकाइयों के लिए जल प्रदाय संबंधी अनुमति स्व-घोषणा के आधार पर दी जाएगी, और भवन अनुज्ञा भी सेल्फ सर्टिफिकेशन के आधार पर प्रदान की जाएगी। यदि निर्धारित समय-सीमा में संबंधित विभाग निर्णय नहीं लेता है, तो पात्र मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जाएगी। इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है।

राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभाएगी। इस सुधार से राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था कारोबार शुरू करने और संचालित करने में लगने वाले समय एवं लागत को कम करेगी।