
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को राजधानी के इंडोर स्टेडियम में ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की नई तस्वीर पेश की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज केवल घरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नवाचार और कड़ी मेहनत के दम पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही हैं। डिजिटल पहल और सम्मान मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर 'लखपति दीदी ग्राम पोर्टल' का शुभारंभ किया, जो ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन कर उन्हें 'लखपति दीदी ग्राम' घोषित करेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 10 लाख महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाने का लक्ष्य रखा गया था। अब तक लगभग आठ लाख महिलाएं इस श्रेणी में आ चुकी हैं। सरकार ने अब इस लक्ष्य को संशोधित कर 10 लाख से पार ले जाने का निर्णय लिया है।
सीएम साय ने जोर देकर कहा कि शासन का अगला पड़ाव 'लखपति ग्राम' का निर्माण करना है। ड्रोन दीदी से लेकर मुर्गी पालन तक में सफलता संवाद के दौरान महिलाओं ने अपनी प्रेरक कहानियां साझा कीं।
बालोद की भुनेश्वरी साहू ने बताया कि कैसे 20 हजार के ऋण से शुरू हुआ सफर आज उन्हें 'ड्रोन दीदी' के रूप में पहचान दिला चुका है। वहीं, बस्तर के दरभा जैसे दुर्गम क्षेत्र की राजकुमारी कश्यप आज मुर्गी पालन से सालाना छह से सात लाख रुपये कमा रही हैं।
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महतारी वंदन योजना: अब तक 70 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 15 हजार करोड़ रुपये की राशि सीधे भेजी जा चुकी है। इस वर्ष के बजट में इसके लिए 8,200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रविधान है।
रानी दुर्गावती योजना: बालिकाओं को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर डेढ़ लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
लखपति दीदी भ्रमण योजना: सफल महिलाओं को देश के व्यावसायिक केंद्रों और शक्ति पीठों का भ्रमण कराया जाएगा।
नवाचार: बकरी पालन क्लस्टर परियोजना और आइआइएम रायपुर के साथ एमओयू के जरिए स्व-सहायता समूहों की आय बढ़ाने के प्रयास शुरू किए गए हैं।
जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। हमारा लक्ष्य लखपति दीदियों को अब 'करोड़पति दीदी' बनाने का है।
-विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री