• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर

साइबर ठगी की रकम से खरीदा सोना, ज्वेलर्स को लगाया लाखों का चूना, रायपुर में तीन गिरफ्तार

साइबर ठगी की रकम को सफेद करने के लिए उसे सोने में बदलकर ज्वेलर्स को चूना लगाने वाले गिरोह का रायपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है।

By Deepak ShuklaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 27 Jul 2026 09:38:24 PM (IST)Updated Date: Mon, 27 Jul 2026 09:38:24 PM (IST)
साइबर ठगी की रकम से खरीदा सोना, ज्वेलर्स को लगाया लाखों का चूना, रायपुर में तीन गिरफ्तार
ज्वेलर्स को चूना लगाने वाले तीन शातिर हुए गिरफ्तार।

HighLights

  1. रायपुर क्राइम और साइबर यूनिट की बड़ी सफलता
  2. ब्लैक मनी को गोल्ड में बदलने का हुआ खेल उजागर
  3. ज्वेलर्स को चूना लगाने वाले तीन शातिर हुए गिरफ्तार

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। साइबर ठगी की रकम को सफेद करने के लिए उसे सोने में बदलकर ज्वेलर्स को चूना लगाने वाले गिरोह का रायपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मनजीत मंडल, निवासी कांकेर, शाहिल नेताम, निवासी संजय नगर, टिकरापारा और आयुष साहू निवासी टिकरापारा को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपितों ने साइबर ठगी की रकम से टिकरापारा क्षेत्र की दो ज्वेलरी दुकानों से सोने के सिक्के खरीदे थे।

पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 12 ग्राम सोने के सिक्के, जिनकी कीमत करीब 1.80 लाख रुपये है, जब्त किए हैं। पुलिस अब साइबर ठगी की रकम के स्रोत और इससे जुड़े नेटवर्क की जांच में जुट गई है।

ज्वेलर्स को इस तरह बनाया शिकार

पुलिस के मुताबिक, पहली शिकायत टिकरापारा स्थित श्री ओम शांति ज्वेलर्स के संचालक ऋषभ शर्मा ने दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 18 जुलाई को दो युवक दुकान पर पहुंचे। एक युवक अंदर आया, जबकि दूसरा बाहर खड़ा होकर निगरानी करता रहा। युवक ने सात ग्राम सोने का सिक्का मांगा। दुकान में एक साथ सात ग्राम का सिक्का उपलब्ध नहीं होने पर उसे एक-एक ग्राम के सात सिक्के दिए गए, जिनकी कीमत 99,900 रुपये थी। भुगतान जगदंबा टीसी नाम की यूपीआइ आइडी से किया गया। दो दिन बाद बैंक ने बताया कि यह राशि साइबर ठगी से जुड़े खाते से आई थी और उसे फ्रीज कर दिया गया है।


राशि साइबर ठगी से जुड़ी होने के कारण होल्ड कर दी गई

इसी तरह दूसरी शिकायत अजय ज्वेलर्स के संचालक अजय सोनी ने दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 17 जुलाई को एक युवक पांच ग्राम का सोने का सिक्का खरीदकर 76,220 रुपये का ऑनलाइन भुगतान कर गया। इसके बाद उसने 23,500 रुपये का एक और भुगतान किया और बाद में सोना नहीं लेने की बात कहकर यह रकम वापस ले ली। बाद में बैंक ने सूचना दी कि खाते में आई कुल 1,99,440 रुपये की राशि साइबर ठगी से जुड़ी होने के कारण होल्ड कर दी गई है और यह रकम वास्तविक पीड़ित को लौटाई जाएगी। इससे ज्वेलर को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

जांच में पकड़ी गई ठगी

दोनों मामलों में टिकरापारा थाना में अपराध दर्ज होने के बाद पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला और पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) राबिन्सन गुरिया के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा टिकरापारा थाना पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने आरोपितों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, यूपीआइ आइडी, बैंक खाते, डिजिटल ट्रांजेक्शन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया।

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ की बेटी ने कॉमनवेल्थ में जीता सिल्वर मेडल, ज्ञानेश्वरी यादव ने 199 किलो वजन उठाकर रचा इतिहास

खर्च करने के बजाय उससे खरीद रहे थे सोने के सिक्के

जांच में राजफाश हुआ कि आरोपित साइबर ठगी की रकम को सीधे खर्च करने के बजाय उससे सोने के सिक्के खरीद रहे थे, ताकि बाद में उन्हें बेचकर रकम को वैध दिखाया जा सके। इसी तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने मनजीत मंडल, शाहिल नेताम और आयुष साहू की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया।

पूछताछ में तीनों ने साइबर ठगी से प्राप्त रकम का उपयोग कर सोने के सिक्के खरीदने और ज्वेलर्स के साथ धोखाधड़ी करना स्वीकार कर लिया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के अन्य सदस्य भी हो सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि साइबर ठगी की रकम आरोपितों तक कैसे पहुंची, इसके पीछे कौन लोग हैं और किन-किन राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से इनका संपर्क रहा है।