
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। हाईस्कूल में आते ही हिंदी जैसे विषय पर विद्यार्थियों के नंबर कम हो जाते हैं। खासतौर पर व्याकरण में बहुत अधिक नंबर कट जाते हैं। कक्षा नवमीं से बारहवीं तक के पाठ्यक्रम में नौ रस को पढ़ाया जाता है। विद्यार्थियों को क्रम से नौ रस याद नहीं रहता। जब भी यह प्रश्न आता है तो उत्तर में कोई न कोई रस छूट जाता है, जिसके कारण पूरे नंबर नहीं मिल पाते।
इस समस्या को देखते हुए शासकीय स्कूल की हिंदी शिक्षिका रजनी शर्मा ने नवाचार के तहत नौ रस को तुकबंदी की तरह तैयार किया है। जैसे कि 'अशांत कवि में हंसते रोते भय से विवाह के दस श्रृंगार किए'। इनमें सभी के पहले अक्षर से रसों का नाम लिखा जा सकता है। जैसे कि अशांत शब्द से अद्भुत रस और शांत रस, कवि के क से करुण रस, वि से वीर रस, हंसते शब्द से हास्य रस, रोते शब्द से रौद्र रस, भय से भयानक रस, विवाह के वि से वीभत्स और वा से वात्सल्य रस, श्रृंगार से श्रृंगार रस।
इस तरह इन रसों के उदाहरण भी वे क्लासरूम में गाते हुए बच्चों को याद करवा रही हैं। हाल ही में उन्होंने यूनिट टेस्ट लिया, जिसका रिजल्ट अच्छा आया। शिक्षिका ने यह प्रयोग इस महीने के अंत में शुरू होने वाली तिमाही परीक्षा को देखते हुए किया है, ताकि बच्चे हिंदी में अच्छा अंक हासिल कर सकें।
हिंदी विषय में नौ रस महत्वपूर्ण हैं, इसके सवाल आते ही हैं। शिक्षिका रजनी का कहना है कि अब नौ रस के उदाहरण भी विद्यार्थियों को इंटरनेट मीडिया से देखकर लाने कह रही हूं, ताकि मोबाइल में सिर्फ रील देखने की बजाय बच्चे ऐसे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए मोबाइल की मदद ले सकें। इसके अलावा वे नौ रस लिखने का अभ्यास भी करा रही हैं।
बहुत सारे विद्यार्थी वीभत्स, रौद्र, श्रृंगार लिखने में गलती करते हैं, इसे भी वे ब्लैक बोर्ड में विद्यार्थियों से लिखवाकर सुधरवा रही हैं। शिक्षिका का कहना है कि नवमीं से 12वीं के पाठ्यक्रम में 15 से 25 नंबर के व्याकरण के सवाल आते हैं और सबसे ज्यादा नंबर व्याकरण में ही कट जाते हैं। नौ रस के बाद अब अलंकार पढ़ने के लिए भी नवाचार पर प्रयोग कर रही हूं, क्योंकि बड़ी कक्षा के बच्चे अलंकार में बहुत गलतियां करते हैं।
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